मैं बोल्यो, भायला!

मैं डूबर्‌यो पाणी मांय

अर थारो कोई

अत्तो-पत्तो कोनी हो।

बोल्यो भायलो,

आणै री तो

मोकळी मंशा थी

पण घरां कोई ढंग रो

छत्तो कोनी हो।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : श्याम गोइन्का ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-27
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