सादी पैलां सीखी कोनी बासदै जगावणो भी

तो भी डीयर थारै घरै चूल्हो सुलगाऊं हूं

चाय बिस्किट अर लेमन सेवन कीधो

आज जळी-बळी, सूखी, बासी बाटी खाऊं हूं

ढाई सौ कम री तो साड़ी कदै पैरी कोनी

आज ढाई रुपयां में काम तो चलाऊं हूं

कमाय नै लावां, थारी टर तो भी जावै कोनी

कचेड़ी में आज हूं तलाक देबा जाऊं हूं।

प्रेम सूं बात करै कंत खांत करै

फाथोडा भरतार देखो म्हनै इसा मिळिया

चोखो सो चूनड़ कदै ओढ़ण विचार करां

सूंड चाड़ै बैठै म्हांसूं कदै नहीं रिळिया

जोर रो जीमण करां, खांत करै ‘पन्नल’ तो

गाळी बोलै और देखो, आप खावै दळिया

कंत म्हारा साफ सुणो, मानो नी जे म्हारी बात

हू तो म्हारै पीवर जाऊं, अै लो थांरा बिलिया।

स्रोत
  • पोथी : जलम भोम ,
  • सिरजक : पन्नालाल ‘पन्नल’ ,
  • संपादक : मूळचंद 'प्राणेश' ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा प्रचार प्रकाशन, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : 2-3, जून-दिसम्बर
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