सुणो हो के!

मैं भी हरियाणै की बेटी हूं

घणी तीन पांच कर्‌यां

दिन में तारा दिखाऊंगी।

स्याणी!

तारा तो तनै देखतांई

आंख्यां सै टूटण लागज्या

कदै तो कहती

थारलै साळै नै कह कर

मुख्यमन्त्री बणाऊंगी।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : भगवतीप्रसाद चौधरी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 12
जुड़्योड़ा विसै