बटलोये पर, भाप सैं

उछळती,

बाटकी बोली

ताऊ!

तनै ताव कोनी लागै कै?

समाधी लगायां ही

उत्तर दियो

बटलोयो

लाडली!

पराई भूख तांई

बिरला तपणो जाणै।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : भगवतीप्रसाद चौधरी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 11
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