मनौती सारूं

म्हैं भी रूंख रै

बांध आयो हूं तागो

ठाह नीं

कुण करसी पूरी

रूंख कै

रूंख में बिराज्या देवता

छठ-चवदस जाय’र

बदरंग हुंवतै तागै नैं देखलूं

अबै मनौतियां

कीं नूंवी भी है

म्हैं जोवूं नूंवो रूंख

कीं तागा

नूंवोड़ै रूंख सूं बांधणै सारू।

स्रोत
  • पोथी : ऊरमा रा अैनांण ,
  • सिरजक : आशीष पुरोहित ,
  • संपादक : हरीश बी. शर्मा ,
  • प्रकाशक : साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली
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