पंखीड़ा री गैरमौजूदगी में,

अेक सदाबहार रूंख रै लारै

मेह भींज्या सूरजाथमण रै साथै

अेक संपूरण आकास आथम रैयौ है।

मरुथळ में डूबतै ओळूं रै समदर री भांत

जळ रा बडा-बडा होदिया सड़क माथै बणग्या है

मेहुड़ै नै जीतणै री सूरज री नादान कोसिस

बेकार सिद्ध हुयगी है।

इण वास्तै हे अगनी पुसप!

पून री पांखां माथै बैठ’र

थूं पाछौ आव!

वौ जिणनै थे माणक कैवौ,

मौत है।

अर समदर रै सूख्यां पछै

तळ री बालुका में मौजूद

उजास रा प्राण किणी दूजी जगै रैवै

बिरखा अर किणी रूंख रै नैड़ा,

जद अै दोन्यूं आपसरी में अेक हुवै।

फूटण वाळी पैली कूंपळ!

अर खिरतोड़ा छैला फळ!

जद पकड़णै रै पैली इज थूं

पून नै दिरीजगौ है

आभौ फगत इण सारू फूल्यौ

के मिनख सरू कर दियौ बधणौ;

जळ रा किनारां माथै, जठै भाटा पड़ै

अर डूब जावै,

देखी सूरतां नै आत्मावां में बदळतां

मतलब, अेक घोंघौ सबद में बदळग्यौ।

अगनी पुसप! थूं पाछौ परौ आव, पाछौ

नू री हथेळ्यां माथै बैठनै।

स्रोत
  • पोथी : अपरंच अक्टूबर-दिंसबर 2015 ,
  • सिरजक : मार्टिन कार्टर ,
  • संपादक : पारस अरोड़ा ,
  • प्रकाशक : अपरंच प्रकासण
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