माथै कफन गळै किरपाण

वा डांडी, पूगै समसाण

अणजाण्या कै आगीवाण

जिका नींव रा भाठा बणसी

वां भाठा पर मिंदर चुणसी

जुग-जुग वां रा गीत सुणासी

लोग लुगायां, कथा-पुराण

काळस कील, दीवड़ां बाळै

खुद बळ जावै, लोक रुखाळै

नुवीं पीढियां पंथ बतावण

बाकी रह जावै सैनाण

परकारज घरबार उजाड़ै

जग पलटै, वां रै पसवाड़ै

वां मिनखां सूं मोटो कोनी

जे साचांणी व्है भगवान

जग री पीड़ परख ले पळ में

बै नर जुग री खातर जलमै

जुग री ओखद वां री बाणी

पीढ्यां पूजै वां रा ठाण

आगीवण बणै खुद आपै

जुग सूं दो पग हालै आगै

लोग बणावै चुण नै नायक

जुग रा नैण परखले पाण

जिकी समाधी लागै मेळा

वो इण सांचै ढळियो पहलां

मरै काळ सूं कद नर-केहर

जीत्योड़ा जीवण-घमसाण

जण-मुगती रो मारग रूंध्यो

जद सूं आगीवाण अदीठ्यो

भटका खावै भावी पीढ़्यां

जीव अमूझै, सुसग्या प्राण।

स्रोत
  • पोथी : मरूवाणी ,
  • सिरजक : सत्येन जोशी ,
  • संपादक : रावत सारस्वत ,
  • प्रकाशक : राजस्थान भासा प्रचार सभा, जयपुर ,
  • संस्करण : 08, अगस्त
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