म्हे थारो नित रूप सरायो, थे नित म्हारा गीत,
दुखियारै जग नै इणसूं के लेणो-देणो मीत।
राता नैण सजाया उजळा सुपनां अणगिण बार,
मुधरा बोल करी नित बधतै चरणां री मनवार,
हियै री पुड़तां खोल दिखायी थर-थर करता होठ,
अपणायत रा परस कल्पनावां रा बांध्या गोट,
सांसां री सौरम सूं सरसी नित नखराळी प्रीत,
सजळ बिरहणी नै इण सूं के लेणो-देणो मीत।
नूंत बुलावै भंवरा नै फूलां रो उजळो रूप,
गूंग जगावै अंतस में सौरम अर रंग सरूप,
तिरपत प्राण करै मुळकता आपसरी में कोड,
सुख-सुपनां करता रैवै है सुरगलोक सूं होड,
मनवारां रै पाण उजागर रै प्रेम्यां री रीत,
अटल दुहागण नै इण सूं के लेणो-देणो मीत।
परस चांद रो पा पून्यूं री रात सरावै भाग,
नखराळी रो समै बीतज्या हेताळु संग जाग,
भावां री पणिहारी नाचै सुपनां-सरवर नीर,
गीतां रो इतिहास लिखीजै है आभै रै तीर,
बांध चाँद नै राखै हंसती गोरी कामण नीत,
काळी मावस नै इणसूं के लेणो-देणो मीत।