जद

छोटो छो

देख्याँ करतो छो

पंछियाँ को उड़बो

आसमान में

सुतन्त्र

तब

बी चावै छौ

उड़बो

हवा सूँ बाताँ करबो

उन्मुक्त

पण

अब जाणग्यो छै

कल्पना का आसमान

अर

सच्चाई की जमीन को

अंतर

प्रत्यख जीवण जमीन छै

अर मनख्या की आसा आसमान

अनंत

अब होग्यो छै मोट्यार

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : हेमन्त गुप्ता पंकज ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशक पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 26
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