कोई सूं खीज्यो मत,

आपणी बात छ।

कहबा की तो कोयनै पर,

बात की बात छ।

बाई (कन्या) देखबा मं घणी सोवणी

पर अेक आंख साफ छ।

घणी गोरी घणी काली,

बस चणा छिलका मान छ।

घणी मोटी घणी पतळी,

बस थोड़ी सी गोळ मोळ छ।

ज्यादा पढ़ी-लिखी अणपढ़,

या तो कहबा की बात छ।

चाहे बाई आठवीं फैल छ,

पण कहंगा कै बी.ए. पास छ।

लड़का की कांई कहणी,

बस लड़की कै लायक छ।

देज-लेज की बात ही कोयनै

घर की बात छ।

कोई रंगीन टी.वी. देवै या कार,

कोई फ्रिज या तो वांकी सरधा छ।

कोई कांईं भी कहवै

आपणी-आपणी इज्जत को सुवाल छ।

म्हानै तो कांईं छाव

पण स्कूटर को सवाल छ।

यो भी इं कारण क्यूं कै

बच्चा को अेक पग छोटो छ।

आपणी तरफ सूं तो कांईं मांग कोयनै

पण आपकै सोच बा की बात छ।

नोकर्‌यां-वोकर्‌यां मं कांई धर्‌यो छ,

आपणै घर की दुकान छ।

कोई सूं खीज्यो मत,

आपणी बात छ।

आरक्षण तो बोल्यो भाई,

दहेज मारी मांग छ।

कोई सूं खीज्यो मत,

आपणी बात छ।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : कमला गोतम ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक–18
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