आखरां सूं परबार हुयोड़ौ आखरां मांय

ओळखो तो-कुण ऊभौ है?

फूलां सूं सराबोर बगीचै में

निगै करौ, कुण चालौ चेतावै?

अकाळ, बाढ, तूफान अर भूडोळ

आं मांय दड़बीजग्यौ है इतिहास

रड़मड़ीजग्यौ है भूगोळ!

सुणो म्हारा साईणा!

आंसू री अेक-अेक बूंद मांय

रामायण सूं महाभारत तांईं रौ

इयै देश में गूंज रग्यौ है अेक अनहद दरद-नाद

अजंता, अेलोरा अर जोगेश्वरी री

गुफावां मांय

अनाम चितेरां अर चलवां री

कूंच्यां अर छैण्यां

सूरत-मूरत री मरोड़ में निजरावै है

आंवता-जांवता नै कामरूप बणावै है

आदमी अर लुगाई

मंदिर अर मूरत

अेक-अेक मांय आर-पार हुंवता थकां अेक-अेक नै नटावै अर

अेक-अेक सूं अजाण बण्या चावै

आओ, देखो अठै

आखरां है पताळ अर

कोरमकोर फूलां री नींव में पळै

आदमी अर लुगाई रौ हेत

(आधी-आधी रात रौ चेत)

डीलौडील आपौआप चुपचाप

रोम-रोम अणजपौ जाप

चालतौ रैयौ है, चाल रैयौ है, चालतौ रैसी

रची पुन्नन मासौ पाप

आणंद मांयली आणंद री अखी थाप

का जाणै जोगी के

का जाणै भोगी!

स्रोत
  • पोथी : माणक (पारिवारिक राजस्थांनी मासिक) ,
  • सिरजक : ओंकार श्री ,
  • संपादक : पदम मेहता ,
  • प्रकाशक : माणक प्रकाशन ,
  • संस्करण : अप्रैल 1983
जुड़्योड़ा विसै