प्राथमिक शिक्षा रौ माध्यम तौ मायड़ भाषा ई होवणौ चाइजै

 

देस-परदेस रै शिक्षा-जगत में जिण नांव री साख देतां राजस्थान वासी गुमेज कर सकै वो अेक नांव है प्रोफेसर वी.वी. जॉन। प्रो. जॉन राजस्थान रा जाया जलम्या नी है, पण वै आज री घड़ी अेक राजस्थानी सूं बत्ता राजस्थानी है। उमर रै इण सिंझ्याकाळ में ई वै पढ़ाई अर भणाई री बाबत सोचत बिचारता रैवै। उणां सूं अबार की दिनां पैली हुई बात-बतळाव रौ राजस्थानी उल्थौ पाठकां री निजरां सामीं प्रस्तुत है—

 

चंद्रशेखर अरोड़ा :  आप इतरा बरस राजस्थान रै शिक्षा-जगत सूं जुडियोड़ा रैया, इण सूबै में तर-तर बधती अणपढ़ियां री जमात भी देखी व्हैला। कांई कारण लखाया के अठै साक्षरता रौ बधापौ नीं होयौ?

 

वी.वी. जॉन : यूं तौ इण अबखाई रा कितरा ई चैरा है, पण दो खास चैरा जका सामी आवै वै है, अेक तो गरीबी, अणथाग गरीबी, इण कारणै लोग आपरै टाबरां नै पढ़ा नी सकै। दूजी बात सरकारी सोच री है। सरकार सोनै के पढ़ाई री व्यवस्था धन सूं जुड़ियोड़ौ मुद्दौ है, अर सरकार कनै सदैव ई धन रौ टोटौ रैयौ है। ओ तौ सरकार रौ परमानेन्ट बाहनौ है।

 

चंद्रशेखर अरोड़ा : सरकार पढ़ाई-भणाई रै लेखै धन तौ निरौ ई खरच करै?

 

वी.वी. जॉन : करै है, पण सवाल है के किण जगै अर किण तरै। खरच रौ कांई म्यानौ है, कोई नीं देखै। कदै ई नीं परख करीजै के किण टाणै कित्तौ खरच हुयौ, उणरौ ‘रिजल्ट’ कांई रैयौ? अठै तांई कैय सकां कै हाथां आयौड़ै धन अर संसाधन रौ बंट भी ढंगसर नीं होवै, कारगर तरीकै सूं नीं होवै। शिक्षा रै नांव खरच कठै होवै—बिल्डिंगां माथै भाटा, ईंट चुणावण खातर। अर पछै चलावणौ पड़ै ‘आपरेशन ब्लैक बोर्ड’ क्यूं के पैलां सूं ही मौजूद सुविधावां रा गुण-दोष नीं कूंतीजै जद इयां ई होवै। बजट तौ बै जावै अर पल्लै की पड़ै ई नी। जरूरत है शिक्षा रौ माहौल त्यार करण री।

 

चंद्रशेखर अरोड़ा : आप नै औ नीं लखावै के गांवांई अर शहरी हलकां में पढाई-भणाई री सहूलियत अर औसर मांय खासौ फरक है?

 

वी.वी. जॉन : हां, औ तौ है। गांवांई हलकां में शिक्षा बाबत राजस्थान घणौ पिछड़्यौड़ौ। घणी सून। इण रै सागै आ भी दुख री बात के प्राइमरी अर ऊंची पढ़ाई री सहूलियत बिचाळै भी बेजा खाई। प्राइमरी स्कूलां में सुविधावां रौ टोटौ। अठै बिचारणौ पड़ैला के इण रौ जिम्मेदार कुण?

 

इण हालत रा जिम्मेदार है राजधानियां में बैठणियां, योजनावां बणावणिया। प्राइमरी रै हक रौ पइसौ, ऊंची पढ़ाई माथै खरच करणौ अन्याव री बात है। जठै तांई आपां प्राइमरी पढ़ाई रौ ठोस ढांचौ त्यार नी करांला, ऊंची पढाई माथै खरचौ करणौ बिरथा है, बेकार है। ऊंची पढ़ाई रौ भी आजकालै ढंग-ढाळौ बिगड़ रैयौ है। यूनिवरसिटियां दिनूं-दिन कूड़ी होवती जा रैयी है, कोई जमानौ हो जद’ के यां विश्वविद्यालयां रौ च्यारूंमेर मान हो।

 

चंद्रशेखर अरोड़ा :   इण मान-सनमांन रै खूटण रौ कारण कांई है?

 

वी.वी. जॉन : ‘स्ट्रेट इंटरफरेंस’। सरकारी तंत्र अर राजनीति री सीधी घुसपैठ होयगी है आं संस्थावां में। शिक्षा-प्रबंध राजनीति रै शिकंजा सूं अळगौ होवणौ चाइजै, पण अबार दूजौ ई रंग—ढंग। हरेक निरणै रै लारै राजनीति। पोखाळौ होय रैयौ है यूंनिवरसिटियां रौ।

 

चंद्रशेखर अरोड़ा : पढाई-भणाई री भाषा रै बाबत आपरौ कांई कैवणौ है?

 

वी.वी. जॉन :  म्हां लोग अेक सुतंतर मुल्क रा नागरिक हां, म्हानै म्हांरी जरुरत मुजब भाषा में पढ़ाई करण रौ हक होवणौ चाइजै। साथै ई औ विचार भी सामीं रांखणौ चाइजै क किसी भाषा म्हाणै शैक्षिक-विकास री आधार बण सकै। म्हानै सही अर सबळै मुकाम पौंचाय सकै।

 

चंद्रशेखर अरोड़ा : मायड़ भाषा में पढ़ाई री बात नै आप कठै तांई हूंकारौ?

 

वी.वी. जॉन : आ तौ बिल्कुल वाजब है, क्यूंके खुद री मायड़ भाषा मे टाबर हर तरै री सीख नै बेगी हीयै उतार सकै। इण रै साथै दूजी भाषावां ई जुड़ सकै, पण मायड़ भाषा पैली। आ पढ़ाई-भणाई री मनस्या, पढण आळा भाई री मनगत बिगसावण रौ ई काम करै। शिक्षा रै वास्तै म्है तीन भाषावां रै फार्मूलै रौ हामी हूं। इण नै ‘टू-प्लस’ फार्मूलौ ई कैय सकां। अेक तो मायड़ भाषा है ई, दूजी वे भाषावां होवणी चाइजै जकी आपनै आपरै प्रांत अर देस सूं बारै रैवणिया लोगां सूं सम्पर्क कराय सकै। दूजां सूं बातचीत रौ जरियौ बण सकै। पढ़ाई करणिया नै खुद सूं औ सवाल करणौ चाइजै कै किसी भाषा सीख’र वौ खुद रै व्यक्तित्व रौ विस्तार कर सकै। म्हारै ख्याल सूं हाई-स्कूल तांई तौ दो भाषावां ई काफी है। प्राथमिक शिक्षा रौ माध्यम तो मायड़ भाषा होवणौ चाइजै। जठै तांई अंग्रेजी भाषा रौ सवाल है, आ भाषा आपरी भणाई में मदद करै, पण इण भाषा में पढ़ाई रै वास्तै दबेलदारी जैड़ी बात नीं होवणी चाइजै। औ राजनीतिक फायदै रौ मसलौ नी है, नीं इण रौ अेक ‘सेटअप’ देशभर में लागू करियौ जाय सकै। म्है आ ई बात केई वळै लिखी हूं अर व्याख्यानां में कैयी हूं। मायड़ भासा रै अलावा दूजी भाषा रौ चुणाव रुजगार री दीठ सूं करण में भलाई है।

 

आपां लोग भारत में भाषा री झोड़ नै लेय’र खासी रापटरौळ मचा दीवी हां, जिणरी कत्तै ई जरूरत कोनी ही। भाषा नै तौ सांस्कृतिक हित रै पाण परोटणौ चाइजै। इण नै राजनीति रै हथियार-रूप इस्तेमाल करणौ बेजा बात है। भाषा चायै राजस्थानी हो के मळयालम, आ जन-जुड़ाव री चीज है, नी के कोई हथकंडा री।

 

चंद्रशेखर अरोड़ा : आप राजस्थान कदै आया?

 

वी.वी. जॉन : राजस्थान म्है 1950 में आयौ। अजमेर कॉलेज रै प्रिन्सीपल री पोस्ट माथै। इण सूं पैला म्है कटक (उड़ीसा) में हो, उत्कल विश्वविद्यालै में पढावतौ। वठै शिक्षा निदेशक रै अेक ओर्डर नै लेय’र दोनां रै बीच खींचमताण री नौबत आयगी। म्है लम्बी छुटियां लेय’र पाछौ म्हारी जलमभोम केरल आयग्यौ। वां दिनां म्है जठै कठै ही रुजगार रा औसर निंगै आवता अेप्लाई कर देवतौ। 1950 रै लगै-टगै इयां हुयौ के म्है आई. अे. अेस में चुणीजग्यौ अर म्हारै कनै अजमेर कॉलेज रौ भी ऑफर आयग्यौ। अेकर तो म्है आई. अे. अेस. सर्विस ‘ज्वाइन’ कर ली। म्हारी पोस्टिंग असिस्टेंट कमिश्नर रै पद माथै सागर (म.प्र.) हुयी। चार-छह महीना रैयौ म्है वठै पण जीव तौ हो म्हारौ ‘अेज्यूकेशन’ मांय, कांई करतौ अफसरी में। म्है होम मिनिस्ट्री नै कागद लिखियौ क म्हनै तौ म्हारै ढब री ई नौकरी चाइजै। अठै अेक घपलौ फेरूं व्हैग्यौ के अेज्यूकेशन विभाग सूं तो म्हारौ नांव हट चुक्यौ हौ। म्है मिनिस्ट्री नै दरख्वास्त दी म्हारौ नांव नुंवै सिरै सूं यू.पी. अेस.सी. नै भेज दियौ जावै। संघ लोक सेवा आयोग म्हनै प्रिन्सीपल बणा’र अजमेर भेज दियौ, उण दिनां अजमेर कॉलेज ‘सेन्ट्रल पॉकेट’ ही। आ कथा है राजस्थान पूगण री।

 

चंद्रशेखर अरोड़ा :  आप अफसरी छोड़’र शिक्षा जगत में पाछा आया। इण निरणै रौ कदैई पछतावौ तौ नीं रैयौ।

 

वी.वी. जॉन : नीं कदैई नीं। औ तो म्हारी मन-मरजी रौ काम। इणमें म्हारी आत्मा रौ सुख। म्हारी ओळख अठै। फेर म्हनै दुखी होवण री चिंता करण री कांईं जरुरत?

 

चंद्रशेखर अरोड़ा : अेकर राजस्थान आयां रै पछै तौ आप लगौलग राजस्थान में ई रैया?

 

वी.वी. जॉन  :  हां, जग्यां भलै ई बदलतौ रैयौ, पण हो राजस्थान मांय ई। महाराजा भूपाल कॉलेज, उदयपुर ई गयौ। अठै म्है प्रांत रौ शिक्षा निदेशक भी रैयौ।

 

चंद्रशेखर अरोड़ा : ओ निदेशक रौ काम भी तौ अफसरी या यूं कैबां ‘ब्यूरोकेसी’ रौ हौ, आप कियां...

 

वी.वी. जॉन : अरे नी, म्है म्हारै मन सूं थोड़ी गयौ इण पद माथौ। हुयी आ कै उण बगत (1962) में म्हैं सीनियर मोस्ट प्रिन्सीपल हो अर पद खाली पड़ियौ हो, भावाजोग ई बैठा दियौ म्हनै वठै। हां आ हुयी के राजस्थान नी छूटियौ। 1969 में म्हैं जोधपुर आयग्यौ, अठै विश्वविद्यालय रौ वाइस चांसलर बण’र। बस वौ दिन अर आज री घड़ी म्है तौ जोधपुर में इज बसग्यौ। म्हारा लड़का ई अठै रुजगार झाल लियौ।

 

चंद्रशेखर अरोड़ा : राजस्थान अर अठै रा लोग आपनै कैड़ा-कीकर लागा।

 

वी.वी. जॉन : अेक तौ आप इण सूं बैरौ कर सकौ’क म्हासूं राजस्थान छूट नी रैयौ है। साफ ई कैवूं तौ राजस्थान मनमोवणौ लागौ अर लोग सांचाणी रा इन्सान। म्हनै कोई दिन अैड़ौ नीं लखायौ के म्है परायौ हूं, सांच औ है क जद म्है उडीसा में हो पल-पल परायौपण मैसूस होवतौ। बौत ओछी दीठ रा लोग हा वठै, वै म्हानै ‘फोरेनर’ समझता, म्हानै रौ मतलब अठै उड़ीसा रै बारै सूं आ’र उठै बसणवाळा सूं है। राजस्थान में तौ म्हनै बधाईज्यौ। म्हनै घणौ मान दियौ औ प्रांत। अठै वैड़ौ (उड़ीसा) पूर्वाग्रह नी दीसियौ, चायै म्है राजस्थान रै किणी हिस्सै में रैयौ; बरौबर अपणायत मिली म्हनै। जद म्है पैलमपैल प्रिन्सीपल बण’र अजमेर आयौ तौ म्हारै मन मांय थोड़ी खटकौ हौ कै स्यात उण दिनां प्रिन्सीपल रौ काम देखण आळौ प्रोफेसर मूंडौ मचकोळै। पण नीं, वो भाई तौ म्हनै हाथूं हाथ बधायौ, म्हनै मांन दियौ।

राजस्थानवासी कदैई किणी रै वास्तै ‘आउट साइडर’ जैड़ौ भाव नीं राखै अर आ घणै हरख री बात है।

(प्रोफेसर वी.वी. जॉन रौ जलम केरल में 16 अक्टूबर 1910 नै हुयौ। आप मद्रास अर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (लंदन) सूं अंग्रेजी में उपाधियां हासल करण रै पछै केरल, उत्कल, राजस्थान अर आगरा विश्वविद्यालयां सूं जुड़ियोड़ी कॉलेजां मांय पढायौ। राजस्थान री कॉलेजां में प्रिन्सीपल ई रैया। शिक्षा निदेशक, राजस्थान पद रौ काम संभाळियौ। 1969 सूं 1972 तांई ‘जोधपुर विश्वविद्यालय’ रा कुलपति रैया।

 

प्रो. जॉन भांत-भांत री संस्थावां रा मानीता सदस्य रैया। वै ‘दिल्ली विश्वविद्यालय’ रा सलाहकार, ‘अल्पसंख्यक आयोग’ रा सदस्य अर ‘इंडियन इन्स्टीट्यूट ऑफ अेडवांस स्टडी’ शिमला रा फैलो है।

 

प्रो. जॉन गुजरात सरकार री राज्य में उच्च शिक्षा ढांचै नै पुनर्गठित करण खातर बणायोड़ी कमेटी रा चेयरमैन रैया, इणी तरै भारत सरकार विश्वभारती रौ ढब-ढाळौ बदळण वास्तै जकी बणाई, आप उण रा सदस्य हा। 1977 सूं 80 तांई प्रो. जॉन केन्द्रीय फिल्म सेन्सर बोर्ड रा सदस्य रैया। वै केरल अर कलकत्ता विश्व विद्यालयां रै वास्तै गठित केरल सरकार रै आयोग रा सदस्य ई हा।

 

प्रो. वी.वी. जॉन ‘सिटीजन फॉर डेमोक्रेसी’ रा 1971 सूं 81 तक चेयरमैन हा। आप ‘इंडियन अेसोसिअेशन फॉर इंगलिश स्टडीज’ रा ई 1978 सूं 81 तांई चेयरमैन रैया।

 

पत्रकारिता अर लेखन रै पेटै ई जॉन साहब घणकरौ काम कियौ। वै 1969 सूं 72 तांई ‘कवेस्ट’ रा संपादक रैया। आप ‘द स्टेट्समैन’ रै निदेशक मंडल रा सदस्य 1972 सूं 78 तक रैया।

 

प्रो. जॉन री लिखियोड़ी पोथियां है— ‘आर्विटिंग प्रोफेसर’, ‘लॉट लगेज’, ‘फ्रीडम टू लर्न’, 'मिस अेडवेन्वर इ हायर अेज्यूकेशन’, ‘अेज्यूकेशन अेण्ड लेंग्वेज पॉलिसी’, ‘द ग्रेट क्लास रुम हो आक्स’।

 

अबार की दिनां पैला प्रो.वी.वी. जॉन ने पोप जॉन पॉल कानी सूं चर्च अर ईसाइयत री मोकळी सेवा खातर अंतर्राष्ट्रीय सनगान ‘नाईट ऑफ द आर्डर ऑफ द सैट ग्रेगरी द ग्रेट’ री उपाधि दिरीजी। औ सनमान हासल करणिया वै राजस्थान में पैला अर अेकला व्यक्ति है।)

स्रोत
  • पोथी : माणक पारिवारिक राजस्थानी मासिक ,
  • सिरजक : वी.वी. जॉन सूं बातचीत करता चंद्रशेखर अरोड़ा ,
  • संपादक : पदम मेहता ,
  • प्रकाशक : माणक प्रकाशन ,
  • संस्करण : मई 1989
जुड़्योड़ा विसै