पदम श्री संकर घोस फरवरी 81 रै म्हीनै ‘रसिकवर सम्मेलन’ में भाग लेवा जोधपुर आया। आप उस्ताद अली अकबर खां साब रै सरोद वादन में तबलै री संगत दीवी। तबलै री दुनियां में संकर घोस देस रा च्यार-पांचेक टाळका साजिंदा में सूं जांणीजै। जोधपुर जात्रा री बगत, संगीत सम्मेलन रै पछै तेजसिंघ जोधा आप सूं ‘माणक’ सारू मिळिया। घोस जी सूं बात-बतळावण कीं इण भांत होई—
तेजसिंघ जोधा : आपरै जलम अर घर-परिवार रै बाबत जांणकारी चास्यूं?
संकर घोस : म्हारौ जलम 1935 री साल कलकत्तै में होयौ। जलम सूं बंगाली हूं। अर घर में संगीत रौ पीढ़ियां सूं ईं धारौ हौ।
तेजसिंघ जोधा : तबलौ सिखावण में आपरा गरू कुण हा?
संकर घोस : म्हैं केई गरू लोगां सूं तबलौ सीख्यौ। पंजाब घरांणै रा उस्ताद फिरोज खां साब, पं. अनाथनाथ बोस, जोधपुर रा पं. सुदरसणजी अर पं. ज्ञानप्रकास घोस म्हारा गरू रह्या।
तेजसिंघ जोधा : कांईं कदै विलायत में प्रोग्रांम देवा रौ ई कांम पड़ियौ?
संकर घोस : क्यूं नीं, केई वार म्हैं प्रोग्रांम देवा सारू यूरोप, अेसिया अर अमरीका रा देसां गयौ। सन् 62 सूं 72 तांईं पूरा 10 बरसां म्हैं उस्ताद अली अकबर खां साब रै साथै अमरीका रह्यौ। वांरी म्यूजिक कॉलेज में तबलौ सिखावा रौ कांम करियौ। म्हैं सन् 66 में विलायत खां साब रै साथै तेहरांन री म्यूज़िक कांफ्रेंस में ईं भाग लियौ।
तेजसिंघ जोधा : परदेसां में भारत रै संगीत री कैड़ी कांईं पूछ?
संकर घोस : सरू-सरू में जद खां साब अर रविसंकरजी गया, जद तौ सब ठीक हौ, पण बीच रा कुछ बरसां में गड़बड़ व्हैगी। बीट्स नै पौपूलरटी मिळी अर हळकै-फुळकै दरजै रौ संगीत ज्यादा चाल्यौ।
तेजसिंघ जोधा : आपनै संगीत रा कुण-कुण सा मोटा कलाकारां रै साथै संगत रौ मौकौ मिळियौ?
संकर घोस : म्हैं तकबरीन सगळा ई मोटा संगीतकारां रै साथै तबलै री संगत कीवी। ज्यूं विलायत खां, रवि-संकर, निखिल बनरजी अर अली अकबर खां, आं सब लोगां रै साथै संगत करवा रौ कांम पड़ियौ।
तेजसिंघ जोधा : लोक संगीत रै बाबत आप कांईं कहस्यौ?
संकर घोस : लोक संगीत री सीमा व्है। उण में ज्यादा सूं ज्यादा ‘राग’ निकळै, इण सूं बेसी कीं नीं।
तेजसिंघ जोधा : तबलौ आपनै कैड़ौ साज लागै?
संकर घोस : सब साजां री आपरी खूबियां व्है, पण कांईं भारत अर कांईं परदेस, तबलै री जोड़ रौ दूजौ साज म्हनै किणीं आर्केस्ट्रा में कोनी दीख्यौ। अेकलौ तबलौ ई अैड़ौ साज जिणरौ दो-दो तीन-तीन घंटां तांई ‘सोलो’ (साव अेकलै रौ) प्रोग्रांम व्है सकै। आपरी संगत सूं वौ दूजा साजां रै संगीत नै सोवणौ अर सरूप करै, जिकौ तौ न्यारौ है ई। तबलै में जितरी ‘रेजोनेंस’ होवै, उतरी किणीं दूजै साज में कोनी।
तेजसिंघ जोधा : तबलै में आप, आपसूं पैला री पीढ़ी अर साथ री पीढ़ी में कुण-कुण सा लोगां रौ नांव लेस्यौ?
संकर घोस : पैला री पीढ़ी में तौ सांता प्रसादजी, अलारक्खा खां अर किसन म्हाराज रा नांव जांणौ अर साथ रा लोगां में कनाई दत्त, चतुर दत्त अर लतीफ अहमद इत्याद रा।
तेजसिंघ जोधा : राजस्थांन इण सूं पैला ई कदै ई पधारिया व्हौला?
संकर घोस : हां, दो-तीन वळा जोधपुर अर जैपर आवण रौ कांम पड़ियौ। राजस्थांन री धरती नै संगीत में मांगत है।