दूजा प्रान्तां ज्यूं राजस्थान में क्रिकेट रौ माहौल हाल कोनी बण्यौ : गावस्कर
सुनील गावस्कर रै बारै में देस भर रै पत्र-पत्रिकावां में इत्तौ बेसी लिख्यौ जा चुक्यौ है क कीं लिखण री हिम्मत ई नीं पड़ै। गावस्कर जकौ शोहरत-सम्मान अर रुपियौ-पइसौ क्रिकेट रै जरियै कमायौ, उणसूं हर किणी नै ईसकौ हुय सकै। लारलै दिनां भारत बनाम वेस्टइंडीज श्रृंखला रै मौकै मद्रास टेस्ट मैच रै दौरान म्हनै उणां सूं बातचीत करण रौ सौभाग्य मिल्यौ। जकी बाततीत हुई वा इण भांत—
जे. अेस. बावा : आजकाल क्रिकेट इत्ती ज्यादा क्यूं खेली जा रैयी है?
सुनील गावस्कर : स्यात आ कीं ज्यादा ई लोकप्रिय है इण वास्तै। भारत रै अलावा जठै ई म्हैं क्रिकेट खेलण नै गयौ, वठै क्रिकेट रै प्रति लोगां री दीवानगी रौ आलम ई कीं और है।
जे. अेस. बावा : ‘वन-डे मैच’ अर ‘टेस्ट मैच’ में आप सिरै किणनै मानौ?
सुनील गावस्कर : दोनूं आप-आपरी जगै सही है। लारलै कीं बरसां में टेस्ट मैच बेहद ऊबाऊ ढंग सूं खेलीजे। पांच-पांच दिनां तांई खेलण रै बावजूद नतीजौ नीं निकळण सूं लोग ‘बोर’ सा हुवण लाग्या। वन-डे मैच रोमांचक ई हुवै अर नतीजौ देवण वाळा ई। पण किणी खिलाड़ी रै धीरप अर तकनीकी गैराई री सही पिछाण तो टेस्ट मैच में ई हुवै।
जे. अेस. बावा : खेलती बगत आपरी जिनगाणी में कदैई निराशाजनक छिण ई आयौ कांई?
सुनील गावस्कर : केई बार। कदै-कदैई इस्यौ इण वास्तै हुवै क आप कीं करण रौ इरादौ ले’र जावौ अर कीं कर नीं पावौ। म्हैं जद 1986 में इंग्लैंड री जात्रा माथै गयौ तो लॉड्रर्स में शतक बणावण री सोच रैयौ हौ, पण इस्यौ हुय नीं सक्यौ। लॉड्रर्स में क्रिकेट खेलणी अेक महान परंपरा है। उठै शतक नीं बणावण री वजै सूं म्हैं इत्तौ निरास हुयग्यौ क फूट-फूट नै रोवण लाग्यौ। तद राजसिंह डूंगरपुर म्हनै संभाळ्यौ।
जे. अेस. बावा : घर सूं दूर रैवतां अेक खिलाड़ी कांई मैसूसै?
सुनील गावस्कर : लगौलग विदेस रा दौरा करण सूं, म्है समझूं, खिलाड़ी ज्यादा थाक जावै। घर रै प्रति ई उणरी कीं जिम्मेदारियां हुवै। केई बार इणी मानसिकता री वजै सूं खिलाड़ी सिरै प्रदरसण नीं कर पावै।
जे. अेस. बावा : किण देस में क्रिकेट खेलणौ अबखौ काम है?
सुनील गावस्कर : लगै-टगै हर देस में। क्यूं क सब रौ वातावरण न्यारौ-न्यारौ हुवै। उणां रा विकेट आप-आपरै ढंग सूं त्यार करीजै। इंग्लैंड में तो मौसम गिरगिट री तरै रंग बदळै। म्है समझूं वठै सही ढंग सूं खेलणौ हर किणी रै बस री बात नीं। विदेसी खिलाड़ी वठै साल भर ‘काउंटी’ खेलता रैवै। आ ई वजै क वे वठै आसानी सूं खेल पावै। पण भारतीय खिलाड़ी वठै ‘काउंटी’ खेलण नै नीं जावै अर इंग्लैंड में आपां रौ प्रदरसण उत्तौ अच्छौ नीं रैवै जित्ती क दूजै देसां में।
जे. अेस. बावा : आजकाल क्रिकेट में दरसकां री जकी भूमिका दिखाई पड़ रैयी है, कांई उणसूं आप संतुष्ट हौ?
सुनील गावस्कर : दरसक तो इण खेल रा सबसूं महत्वपूर्ण अर अनिवार्य अंग है। इणां रै बिना तो इण खेल री लोकप्रियता इत्ती स्यात् नीं बढ पावती। हर देस रै दरसकां रौ अंदाज न्यारौ-न्यारौ है। पण म्हैं ओ कैवणौ चावूंला क किणी ई दरसक नै अणूंतै ई उछाव में आ’र खिलाड़ी री अेकाग्रता भंग नीं करणी चाइजै। किणी ई खिलाड़ी रै अच्छै खेल माथै उणनै मैदान में आ’र ‘डिस्टर्ब’ नीं करणौ चाइजै। इणरै अलावा दरसकां नै चाइजै क गुस्सै में आ’र कोई चीज खिलाड़ियां माथै नीं फेंकै अर उणां रै खिलाफ अश्लील नारा ई नीं लगावै। इणसूं खिलाड़ियां नै घणौ दुख मैसूस हुवै।
जे. अेस. बावा : कांई अम्पायर घरेलू टीम रौ पगस लेवै?
सुनील गावस्कर : लारलै कीं बरसां में अम्पायरां माथै घणी नुक्ताचीनी करीजी है। अम्पायर तटस्थ हुवै, आ बात आज लागू नीं हुवै। कीं श्रृंखलावां में अम्पायरां आपरी टीम नै जितावण सारूं आपरी देशभक्ति रौ पूरौ-पूरौ परिचै दियौ। इंग्लैंड बनाम पाक श्रृंखला में अंपायर शकुर राना अर माइक गैटिंग रै बीच जकौ कीं ई हुयौ, वो इण बात रौ संकेत है क अबै दूसरे देसां रा अम्पायर ई नियुक्त कर्या जावै तो बेहतर हुसी। नींतर क्रिकेट मैदान जुद्ध रौ अखाड़ौ निंगै आवण लागसी।
जे. अेस. बावा : आजकाल किण भांत सूं विकेट बणावणा चाइजै?
सुनील गावस्कर : पुरी दुनिया में क्रिकेट खेलण वाळा देस बैटिंग विकेट बणावण माथै ज्यादा ध्यान देय रैया है। उणां नै चाइजै क वे गेंदबाजां नै मदद देवण वाळा विकेट ई त्यार करवावै। विकेट बौत ज्यादा तेज अर अनियमित उछाळ वाळा नीं हुवणा चाइजै जियां क न्यूजीलैंड में वेलिंगटन, वेस्टइंडीज में किंग्सटन (जमैका) अर आस्ट्रेलिया में पर्थ रौ विकेट है। आं जगावां बल्लेबाजां नै चोटां लागण रौ डर है।
जे. अेस. बावा : राजस्थान में आप क्रिकेट खेल चुक्या हौ, अठै रे क्रिकेट रै बारै में दो सबद?
सुनील गावस्कर : राजस्थान सूं किणी बगत बडा अच्छा खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट रै खितिज माथै दिखाई दिया, जियां क हनुमंतसिंह, सलीम दुर्रानी, पार्थसारथी शर्मा इत्याद। आज राजस्थान सूं टेस्ट खिलाड़ी निजर ई नीं आय रैया है। इणरी वजै स्यात् आ ई है क दूजै राज्यां री भांत वठै क्रिकेट रौ माहौल नीं बण्यौ है।
जे. अेस. बावा : जयपुर अर जोधपुर रै स्टेडियमां रै बारै में आपरी कांई राय है?
सुनील गावस्कर : जयपुर रौ सवाई मानसिंह स्टेडियम पैला अंतर्राष्ट्रीय मैचां सारू राजस्थान रौ अेकमात्र स्डेडियम हौ, पण अबै जोधपुर में ई ‘बरकतुल्ला खां स्टेडियम’ री निरमाण हुयग्यौ है। जयपुर रौ विकेट बौत धीमौ है अर उण माथै घास बिलकुल नीं है। पण जोधपुर रौ स्टेडियम घणौ बडौ है अर बौत खूबसूरत ई लागै। उठै रौ विकेट ई जयपुर रै विकेट सूं म्हनै कीं तेज़ अर स्पिनरां नै मदद देवण वाळौ लाग्यौ। इणरै अलावा राजस्थान री मेहमाननवाजी री कला ई म्हनै घणी प्रभावित करी।
जे. अेस. बावा : आं दिनां आप कांई कर रैया हौ, अर भविस री कोई योजना हुवै तो म्हनै बतावौ?
सुनील गावस्कर : टेस्ट मैचां सूं संन्यास लेवण रै बाद ई क्रिकेट सूं तो किणी-न-किणी रूप में आप म्हनै जुड़ियोड़ौ पावौला ई। आं दिनां म्हैं ‘स्पोट्र्स वीक’ नांव री अंगरेजी पत्रिका सूं जुड़्योड़ौ हूं। कीं बगत बाद शरजाह में हुवण वाळै ‘मिनी वर्ल्ड कप’ सारू दुबई जावूंला। इणरै अलावा मैचां रै दौरान कमेंट्री बॉक्स में आप म्हनै सुण सकोला। बाकी भविस में कांई बदळाव हुसी, ओ हाल कीं नीं कैयौ जाय सकै।