बीकानेर रै सरदारशहर में सन 1908 नै जनम्या पं. मधुर रौ मूळ नांव वृद्धिचंद अग्रवाळ। सरल अर शांत सुभाव वाळा पं. मधुर हिंदी फिलम जगत सूं लारलै केई बरसां सूं जुड़्या थका। आप गीत, संवाद अर पटकथा लिखण रै साथै-साथै फिलम-निरमाण ई कर्यौ।
“वो बगत हौ सन् 1944 रै आसै-पासै रौ। जद अेक गीतकार नै अेक गीत लिखण रा पैंतीस रुपिया मिल्या करता, अर पूरी फिलम बणावण री लागत आवतीही पच्चीस हजार रुपिया। पण उण बगत गीतकार री अहमियत ही, उणरौ सम्मान हौ अर फिलम निरमातावां रौ ई कलाकार लोग आदर कर्या करता। अब बगत अैड़ौ आयग्यौ है के निरमातावां नै कलाकारां रै आगै झुकणौ पड़ै— पं. मधुर उण सोनल यादां में डूबता थकां बतावण लागै।
आज रै लोकप्रिय संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल नै आपरी फिलम ‘पारसमणी’ में पैलीवार बतौर अ संगीतकार ‘ब्रेक’ दियौ हौ उण जमानै रा चावा गीतकार अर फिलम-निरमाता पं. मधुर।
प्रस्तुत है ‘माणक’ रै पाठकां सारू पं. मधुर सूं सत्येन व्यास री कर्योड़ी बातचीत।
सत्येन व्यास : पंडितजी, आपरी फिलमां में दिलचस्पी कीकर हुई, वा ई उण बगत जदकै लोग फिलम रै नांव सूं ई परहेज करता हा?
पं. मधुर : नीं, अैड़ी बात तो नीं है। आज सूं पचास साल पैली फिलमां री सरूआत रौ दौर हौ, फिलमां बणती ही। पण उण जमानै में नाटकां रौ ई घणौ चलण हौ। अर म्हारी जिंदगाणी रौ ओ सफर ई नाटकां सूं सरू हुयौ। बिंया प्रेरणा म्हनै म्हारै लेखक पिताजी सूं मिली अर उणनै आधार दियौ स्वामी श्रद्धानंद जैन, आचार्य श्री काळूराम राम अर जुगलकिशोरजी बिड़ला।
सत्येन व्यास : नाटकां रौ ओ सफर कठै सूं कद अर कीकर सरू हुयौ?
पं. मधुर : वो जमानौ पारसी नाटक कंपनियां रौ हौ। म्हारी भेंट पैल-परथम कलकत्तै में ‘मेलाफोन रिकार्डिंग कंपनी’ रै संचालक जी. अेन घोष सूं हुई। वे म्हारै सूं सन 1932 में दो नाटक ‘रामायण’ अर ‘कृष्ण-सुदामा’ लिखवाया। उणरै बाद अेच. अेम.वी. अर मेनोला रिकार्डिग कंपनियां सारू लिखतौ थकौ म्हैं अल्फ्रेड अर कोरोन्थियन थियेटरां सूं ई संपरक बणायौ राख्यौ।
सत्येन व्यास : इणरौ मतलब आप गीतकार सूं पैली नाटककार बणग्या?
पं. मधुर : ओ सब बगत करवायौ। कारण के नाट्य लेखन रै गिरतै स्तर नै देखतां थकां ई म्हैं नाटक लिखण रौ बीड़ौ उठायौ अर लिखतौ गयौ।
सत्येन व्यास : उण बगत किसा गायकां आपरै गीतां नै स्वरबद्ध कर्या?
पं. मधुर : उण जमानै रा सगळा ई चावा गायकां, उदाहरणस्वरूप कांताबाला, इफ्तिखार, ज्योतिका राय, हेमंतकुमार, जगमोहन, पंकज मलिक, के.सी. डे इत्याद सगळा ई म्हारै गीतां नै स्वरबद्ध कर्या?
सत्येन व्यास : नाटकां में स्थायित्व आपनै कद मिल्यौ?
पं. मधुर : सन् 1934 में म्हारा दो नाटक घणा चावा हुया—‘दौलत की प्यास’ अर ‘अमर बलिदान’। इणां में उण जमानै री अभिनेत्री मिस रेचल उर्फ रमोला नै पैली बार पेस कर्यौ हौ। लगै-टगै 55 नाटक खेलीज्या। इणा में ‘दुर्गादास’, ‘हुर हिटलर’ ‘भगवान का नीलाम’ अर ‘मीरा बाई’ बौत चरचित हुया।
सत्येन व्यास : इणां रै बाद?
पं. मधुर : बाद में तो म्हनै चावा फिलम निरदेसक स्व. पी.सी. बरुआ सन् 1940 में आपरी फिलम ‘जवाब’ सारू गीत लिखवाया, ‘यह दुनिया तूफान मेल’, ‘अे चांद छुप ना जाना’, ‘क्यों ना करूं प्यार’ गीत घणा लोकप्रिय हुया। उणरै बाद फिलम ‘होस्पिटल’ में गीत लिख्या—‘प्रभुजी राखो लाज हमारी’ इत्याद।
सत्येन व्यास : कलकत्तै सूं बंबई आवण री वजै?
पं. मधुर : उण जमानै रा फिलम निरमाता-निरदेसक अे.आर. कारदार म्हनै बंबई ले आया अर संगीतकार नौशाद साहब रै साथै म्हारै सूं फिलम ‘संन्यासी’ सारू गीत लिखवाया। पछै गुलाम हैदर रै साथै ‘हुमायूं अर संगीतकार खेमचन्द्र प्रकाश रै साथै ‘बेगम’ सारू गीत लिख्या। उणरै पछै पी. अेन. अरोड़ा री फिलमां, ‘रेल का डिब्बा’ सूं ‘सितारां’ तांई, रा गीत लिख्या।
सत्येन व्यास : अबार तांई आप कित्ती फिलमां रा गीत, सक्रीन प्ले अर संवाद लिख चुक्या हौ?
पं. मधुर : लगै-टगै 60 फिलमां रै करीब तो हुय ई गी है।
सत्येन व्यास : कांई आप फिलम निरमाण रौ काम ई कर्यौ? जे कर्यौ है तो उण बाबत कीं बतावौ?
पं. मधुर : सन् 1962 में बाबू भाई मिस्त्री रै साथ म्हैं फिलम ‘पारसमणी’ रौ निरमाण कर्यौ, जिण में संगीतकारां री नवी जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल नै पैली बार ‘ब्रेक’ दियौ हौ।
सत्येन व्यास : उणरै बाद?
पं. मधुर : उणरै बाद किणी फिलम-निरमाण सूं नीं जुड़्यौ। हां, ‘आया तूफान’, ‘शंकर-सीता-अनसूया’, ‘कृष्ण-अर्जुन’, ‘पांचवीं मंजिल’ इत्याद फिलमां री पटकथा, संवाद अर गीत लिख्या।
सत्येन व्यास : आं दिनां ई आप कोई फिलम सूं जुड़्या हौ कांई?
पं. मधुर : हां, आं दिनां म्हैं राजस्थानी फिलम ‘जय रामा पीर’ सारू पटकथा, संवाद अर गीत लिख्या है।
सत्येन व्यास : आपरी किण-किण फिलमां रा गीत घणा लोकप्रिय हुया अजै तांई?
पं. मधुर : मेहबूब खां री फिलम हुमायूं रौ ‘पीपल की छांव तले’, सीं. रामचंद्र रै संगीत निरदेसन में बणी फिलम ‘ललकार’ रौ ‘महलों वाले इस दुनिया में’, फिलम ‘बंजारिन’ रौ ‘चंदा रे मोरी पतिया ले जा, बतिया ले जा’, फिलम ‘रेल का डिब्बा’ का ‘भगवान तेरी दुनिया में इंसाफ नहीं है’ इत्याद गीत हदभांत ई लोकप्रिय हुया।
इणां रै अलावा ‘संन्यासी’, ‘अभियान’, ‘प्रभु की महिमा’, ‘चोर बाजार’, ‘सितारा’, ‘संपूर्ण रामायण’, ‘महाभारत’, ‘हरिश्चंद्र’, ‘माया मछन्दर’, ‘बेगम’ अर ‘हरिश्चंद्र तारामती’ रा गीत घणा लोकप्रिय हुया।