राजस्थानी नै संवैधानिक मानता सारू भाजपा रौ पूरौ समर्थन : आडवाणी
जोधपुर में 1 सूं 11 अक्टूबर तांई पैलीबार आयोजित भारतीय जनता पार्टी री राष्ट्रीय कार्यकारिणी री बैठक में हिस्सौ लेवण सारू भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी समेत राष्ट्रीय अर प्रांतीय स्तर रा अनेक नेता जोधपुर पधार्या। आं सगळा जोधपुर में विसाळ जनसभा नै संबोधित ई करी।
भाजपा अध्यक्ष आडवाणी जोधपुर अर जैसळमेर जिलै रै अकाळ सूं प्रभावित छेत्रां रौ दौरौ ई कर्यौ। आप राय परगट करी कै ‘इंदिरा गांधी नहर’ समेत पेयजळ योजनावां सर्वोच्च प्राथमिकता सूं पूरी करीजणी चाइजै। ‘इंदिरा गांधी नहर’ नै तो राष्ट्रीय परियोजना रौ दरजौ देय’र केन्द्र सरकार नै इणनै पूरी करण री जिम्मेदारी आपरै ऊपर लेवणी चाइजै। इणसूं अकाळ पीड़ित लोगां नै भारी संख्या में उठै रोजगार मिल सकै। आप राहत कामां माथै लाग्योड़ै मजदूरां नै हफ्तै भर में मजदूरी रौ भुगतान करण रौ सुझाव दियौ।
इण मौकै ‘माणक’ सारू कीं खास विषयां माथै आपसूं बातचीत करीजी। प्रस्तुत है ‘माणक’ रै पाठकां सामी श्री गुलाब बत्रा री करियोड़ी बातचीत रौ राजस्थानी उल्थौ—
गुलाब बत्रा : देस रै मौजूदै हालात अर चुणाव री संभावना रै बारै में आप कांई कैवणी चावौला?
आडवाणीजी : हालांकै लोकसभा अर घणकरै राज्यां री विधानसभावां रा चुणाव हुवण में हाल दो साल बाकी है, पण असफळतावां रै ढेर माथै ऊभी राजीव सरकार हालात औरूं बदतर हुवण सूं पैली ई चुणाव कराय सकै। जे राजीव गांधी आपरी गुप्तचर सेवावां रै जरियै लोकसभा री तीन सौ सीटां जीतण संबंधी सूचनावां रौ आकलन कर लियौ तो वे चुणाव रौ जूवौ ई खेल सकै। हालांकै उणां रै कनै चुणाव लड़ण रौ कोई मुद्दौ नीं है, पण वे झूठै मुद्दै नै आधार बणा’र चुणाव री बाजी नीं जीत सकै। हां, विपक्षी दळां रै हाल अेक नीं हुवण री स्थिति रौ ई राजीव गांधी लाभ उठावण री बात सोच सकै।
गुलाब बत्रा : देस में, खास करनै राजस्थान में सूखै री स्थिति रै बारै में आप कांई कैवणौ चावौला?
आडवाणीजी : ओ तो सही है क राजस्थान समेत देस रै केई राज्यां में अकाळ री भयानक स्थिति है। पण सूखै री स्थिति है। सूखै री समस्या रौ फगत तात्कालिक हल ई नीं, स्थायी समाधान ई खोज्यौ जावणौ चाइजै। अकाळ रै बगत लोगां नै रोजगार सुविधा उपलब्ध करवा’र सरकार कोई अैसान नीं कर रैयी है। राजस्थान में तो केई महीनां तांई राहत काम बंद राखीज्या। हकीकत में रोजगार रौ अधिकार तो बुनियादी अधिकार हुवणौ चाइजै। हर हाल में हरेक नै रोजगार री गारंटी हुवणी चाइजै।
गुलाब बत्रा : जनता सरकार अर मौजूदा सरकार रै क्रिया-कलापां में कांई फरक मैसूस करौ?
आडवाणीजी : अेक सरकार रै रूप में जनता सरकार घणी अच्छी सरकार ही। फगत पार्टी री गड़बड़ी ही। जनता सरकार में सगळा मंत्री आप-आपरै विभागां रै प्रति पूरी तरियां उत्तरदायी हा। पण मौजूदा सरकार में तो सगळै ई मंत्रियां नै ऊपर सूं नीचै कानी देखणौ पड़ै।
गुलाब बत्रा : आप जनता सरकार में सूचना अर प्रसारण मंत्री रैय चुक्या हौ, कांई आप ‘दुरदर्शन’ री मौजूदा नीति रै बारै में कीं कैवणी चावौला?
आडवाणीजी : हिन्दुस्तान रै संदर्भ में अर उणरै सीमित संसाधनां नै देखता थकां ‘दूरदर्शन’ उच्च प्राथमिकता रै छेत्र में नीं आवणौ चाइजै। आपां री उच्च प्राथमिकता गांवां मं पेयजळ, शिक्षा, चिकित्सा जैड़ी जरूरतां नै पूरी करण की हुवणी चाइजै।
दरअसल 1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी टी.वी. सूं मिलण वाळै राजनीतिक लाभ री उपयोगिता नै देखता थकां अचाणचक ‘दूरदर्शन’ रै विस्तार री नीति अख्तियार करी अर अेशियाई खेल इण सारू अेक बायनौ बणग्यौ।
पण 1984 रै बाद सूं जिण तरै सूं उपभोक्तावाद रौ विकास हुयौ अर ‘दरदर्शन’ सूं उणरौ प्रचार-प्रसार हुयौ, उणसूं जकौ सामाजिक तणाव पैदा हुय रैयौ है, उणरी कण'ई कल्पना तकात नीं करी जाय सकै। टी.वी. माथै करीज रैयी विग्यापनबाजी आपां री सामाजिक व्यवस्था नै तोड़-मरो ड़’र मेल देसी अर आम आदमी भरम में भटकसी।
गुलाब बत्रा : नवी शिक्षा नीति रै बारै आप कांई कैवणौ चावौला?
आडवाणीजी : इणमें कीं ई नवौ नीं है। फगत सबद ई नवा है। इण नीति सूं कीं नवौ हुवतौ नीं दीसै।
गुलाब बत्रा : राजस्थान समेत पिछड़्योड़ै दूजै राज्यां रै विकास रै संदर्भ में भाजपा रौ कांई दृष्टिकोण है?
आडवाणीजी : भारतीय संविधान में केन्द्र राज्यां रै संबंध में राज्यां रै विकास सारू उणांनै जका संसाधन दिरीज्या, वे अपर्याप्त सिद्ध हुया है। ओ ई नीं, वित्त आयोग संसाधनां रौ आवंटन इण तरियां कर्यौ कै पिछड़योड़ा राज्य और पिछड़ता गया। राजस्थान रौ पिछड़ौपण इणरौ अेक उदाहरण है। इण वास्तै भाजपा वित्त आयोग नै ज्ञापन देवण सारू अेक समिति बणाई है, जकी वित्त-विशेषज्ञां सूं विचार विमर्श कर’र अेक रिपोर्ट त्यार करसी। इण समिति मांय पूर्व मुख्यमंत्री राजस्थान, भैरौसिंह शेखावत, शांताकुमार सुंदरलाल पटवा, कैळाश जोशी अर विजयकुमार मल्होत्रा सामल है।
गुलाब बत्रा : पंजाब समस्या रै संदर्भ में नदी जळ-बंटवारै में राजस्थान रै हितां री सुरक्षा सारू भाजपा रै केन्द्रीय नेतृत्व रौ कांई सोचणौ है?
आडवाणीजी : इण मामलै में भाजपा रौ दृष्टिकोण बिलकुल साफ है अर वो ओ कै पंजाब समस्या रै सिलसिलै में रावी-व्यास नदी जळ बंटवारै में राजस्थान रौ मामलौ पाछौ खोलण री जरूरत नीं है।
आज सूं चार साल पैली तांई पंजाब री समस्या प्रमुख रूप सूं राजनीतिक ही। कैवण रौ मतळब उण में नदी-जळ, भूमि, चंडीगढ इतयाद रौ विवाद ई हौ।
म्हनै याद आवै 1983 रै सरूआत में केन्द्र सरकार इण मामलै रै वास्तै अकाळीदळ अर दूजै विपक्षी दळां नै बुला’र त्रिपक्षीय वार्ता करीजी ही। रावी-व्यास नदी जळ बंटवारै माथै जद अकाळी दळ राजस्थान नै ई जोड़्यौ तद विपक्षी दळां तीनूं ई राज्यां रै प्रतिनिधियां नै बैठक में आमंत्रित करण री मांग राखी। इण बात माथै राजस्थान रा तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर अर पूर्व मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत आपरै राज्य रौ पगस राखियौ। शेखावत राजस्थान रौ पगस इसै तर्क अर युक्तिसगत ढग सूं राख्यौ कै अकाळी दळ रै कनै उण रौ कोई जबाब नीं हौ। सगळै ई विपक्षी दळां रा नेतावां रै समर्थन रै कारण अकाळी दळ ई त्रिपक्षीय वार्ता में इण बात माथै सहमत हुयौ के भविस के नदी-जळ-बंटवारै में राजस्थान रौ मामलौ नीं खोल्यौ जावैला।
ओ ई नीं, भाजपा रै विशेष आग्रह माथै केन्द्र राज्यां रै आपसी संबंधा री समीक्षा रै संदर्भ में आनंदपुर साहब प्रस्ताव रौ उल्लेख तकात नीं करण री बात माथै अकाळी दळ आपरी सहमति जताई ही।
म्हारी धारणा है कै त्रिपक्षीय वार्ता में हुई चरचा अर निर्णयां रै आधार माथै समझौतौ कर लियौ जावतौ तो पंजाब समस्या रौ मामलौ इत्तौ आगै नीं बढतौ कै सरकार नै ‘आपरेशन ब्लू स्टार’ जैड़ौ कदम उठावणौ पड़तौ। पण वा समझौतौ नीं करणी चावती ही। कारण कै लोकसभा चुणाव में उण बगत दो साल बाकी हा, इण वास्तै सरकार इण विवाद नै लंबौ खींचणी चावती ही। नतीजन राजनितिक समस्या री जगै अलगाववाद री समस्या लेय ली। पैली नहरी पाणी, चंडीगढ इत्याद विवादां माथै हिंसा भड़काईजती ही, पण ‘आपरेशन ब्लू स्टार’ रै बाद आ भावना जगाईजी कै सिख लोग भारत में इज्जत सूं नीं रैय सकै। अर तद सूं ले’र अब तांई उग्रवाद रौ सहारौ लेवण वाळा ‘खालिस्तान’ रौ लक्ष्य ले’र चाल रैया है।
आतंकवाद री समस्या फगत कानून व्यवस्था री समस्या नीं है। आ देस री अेकता नै चुनौती देवण वाळां री समस्या है अर इणरौ जबाब करड़ाई सूं दिरीजणौ चाइजै। म्हनै आ देखनै दुख हुवै कै सरकार इण समस्या नै दिनौदिन बिगाड़ती इज जाय रैयी है। साची बात तो आ है कै प्रधानमंत्री राजीव गांधी री पंजाब रै बारै में कोई नीति ई नीं है। प्रधानमत्री रै सलाहकारां नै बदळण रै साथै-साथै पंजाब-नीति ई बदळ जवै अर देस नै इण ढुलमुल नीति रा बुरा नतीजा भुगतणा पड़ रैया है।
गुलाब बत्रा : 1971 में पाकिस्तान सूं आया सिंधी-मुसळमान विस्थापितां री समस्या रै बारै में आपरा कांई विचार है?
आडवाणीजी : जद कोई कठै ई सूं विस्थापित हुवै तो उणरै सामी केई समस्यावां आवै। तत्कालीन सरकार री ढिलमिल नीति री वजे सूं विस्थापित शरणार्थी अधरझूल में लटक्या रैया। जनता सरकार में उणां नै भारतीय नागरिकता मिल सकी। फेरूं ई उणां री हाल केई समस्यावां है।
गुलाब बत्रा : दो बरसां पैली गांधीनगर में भाजपा पंचवर्षीय कृति योजना बणाई ही, इणरी क्रियान्विति रै बारे में आप कांई कैवणो चावौला?
आडवाणीजी : इण योजना रौ क्रियान्वयन केई राज्यां में तो ठीक हुयौ है अर केई राज्यां में ठीक नीं हुय पायौ है। पण समीक्षा रै बाद ई स्थिति साफ हुय सकसी। इणी योजना रै त्हैत लोकसभा रा आगामी चुणाव री तय्यारियां करण रौ कार्यक्रम हौ। इण माथै काम चाल रैयौ है, पण जे प्रधानमंत्री बगत सूं पैली चुणाव कराय लियौ तो तै ‘शिड्यूल’ में फेर-बदळ करणौ पड़सी।
वियां संगठन री दीठ सूं लारलै बरस तांई भाजपा रा आखै देस में कोई 35 लाख सदस्या हा। संगठन रै न्यारै-न्यारै स्तरां माथै चुणाव री प्रक्रिया चाल रैयी है अर आगलै बरस मार्च तांई पार्टी रै राष्ट्रीय अध्यक्ष रौ चुणाव हुय जासी। अप्रैल में वाराणसी में राष्ट्रीय परिषद रौ महाधिवेशन हुसी जिण में नवौ अध्यक्ष आपरौ पद रौ कार्यभार संभाळसी।
गुलाब बत्रा : वामपंथी दळ भाजपा नै दूजै विपक्षी दळां सूं अलग-थळग कर’र आपरौ प्रभाव छेत्र बणावण री जकी योजना बणाई है, उण बाबत आपरौ कांई कैवणौ है?
आडवाणीजी : जे हिन्दुस्तान रौ नकसौ देखां तो पंजाब, त्रिपुरा अर कीं छोटी-मोटी पाकेट में मार्क्सवादी दळां रौ प्रभुत्व है। कुल मिला’र इणां री लोकसभा री सीटां 64 बणै। आंध्रप्रदेश, बिहार इत्याद राज्यां री कीं बेल्ट मिलावां तो अे सीटां 125 सूं आगै नीं बैठै। इणसूं पूरी लोकसभा या देस री राजनीति नै प्रभावित करणौ संभव नीं है।
म्हारौ तो ओ मानणौ है कै वामपंथी दळां रौ प्रभाव छेत्र पैली सूं घटियौ है। पैली उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, पंजाब तकात सूं लोकसभा सारू वामपंथी उम्मीदवार जीत’र आवता हा। अबै उणां रौ चुणाव तो आगौ रैयौ, आं राज्यां री विधानसभावां में अेकाध सीट लेवणी ई मुस्कल हुय रैयौ है।
गुलाब बत्रा : आजादी रै बगत राजस्थान री भाषा राजस्थानी घोषित नीं करवाय’र म्हां हिन्दी करवाय दी ही, इण वास्तै कै हिन्दी प्रांत इक्का-दुक्का हा। हिन्दी सारू कर्योड़ै त्याग रौ प्रतिफळ म्हांनै आज ओ मिल रैयौ है कै आठ करोड़ राजस्थानियां री मायड़ भाषा नै सरकार संवैधानिक मान्यता नीं दे रैयी है। इण बाबत आपरौ कांई रुख है।
आडवाणीजी : म्हे राजस्थानी रै पगस में हा। अर राजस्थानी रै ई क्यूं म्हे तो नेपाली रै ई पगस में हा। अेकाध बार डॉ. करणीसिंह लोकसभा में राजस्थानी रौ मुद्दौ उठायौ ई हौ, पण बात किणी कारणां सूं बैठी नीं। खैर, भविस में जद ई राजस्थानी रौ मुद्दौ उठैला, राजस्थानी सारू राजस्थानियां रौ पगस लेवांला।
गुलाब बत्रा : राजस्थानी भाषा री पत्रिका ‘माणक’ अबार आप देखी ई हौ, इणरै बारै में आपरा कोई विचार है? साथै ई ‘माणक’ रै पाठकां सारू कोई संदेश?
आडवाणीजी : ‘माणक’ देख’र तो म्हनै इचरज रै साथै अणूंतौ हरख ई हुयौ। म्हैं आ कल्पना तकात नीं कर ही कै राजस्थानी भाषा में इत्ती बढिया अर सोवणी पत्रिका निकळी हुवैला। इणनै देख’र तो मतै ई मानणौ पड़ै कै राजस्थानी भाषा वाकई सिमरिध भाषा हुसी। इण सारू ‘माणक’ परिवार नै बधाई। साथै ई ‘माणक’ रै पाठकां नै हेत साथै-साथै म्हारी घणी-घणी शुभकामनावां।