उस्ताद अली अकबर खां नै सुणतां


सुणियां इचरज तौ व्हैसी पण यूरोप अर अमरीका रा देसां में अैड़ा संगीत-प्रेमी लोगां रौ घाटौ नीं, जिका भारत नै फगत अली अकबर खां रै नांव सूं ई ओळखै। भारत कुण-सो, के अली अकबर खां वाळौ!

 

कांईं आप जाणौ के सरोद रा सिरायत खां साब कदैई जोधपुर रजवाड़ै रा दरबारी-संगीतकार हा?

 

फरवरी म्हीनै खां साब ‘रसिकवर सम्मेलन’ में जोधपुर पधारिया, तौ आप सूं मिळिया ‘माणक’ रा सम्पादक तेजसिंघ जोधा।

 

सरोद रा सिरायत, पदमभूसण उस्ताद अली अकबर खां साब रौ जलम, वीसवैं सईकै रा जगचावा संगीतकार पदम विभूसण डॉ. अलाउदीन खां साब रै घरै व्हियौ।

 

संगीत रै जिण घरांणै सूं खां साब तालुक राखै, वौ उतरादै भारत रै संगीत रौ ‘अलाउदीन मैयर घरांणौ’ बाजै। औ घरांणौ तानसेन री परम्परावां सूं जुड़’र चालै।

 

आप फगत तीन बरस री ऊमर सूं संगीत सीखबौ सरू कियौ। नित हमेस 18 घंटा रौ अभ्यास। अर बीस बरस री ऊमर तांईं पूगतां-पूगतां अप जोधपुर म्हाराजा रा ‘दरबारी संगीतकार’ बणगा।

 

सन् 65 सूं आप कैलीफोर्नियां (अमरीका) में ‘अली अकबर कॉलेज ऑफ म्यूजिक’ चलावै। उतरादै भारत रै क्लासिकल म्यूजिक रौ धूंसौ आखी दुनियां में बजावणियां अबार री घड़ी दो ई संगीतकार। अेक तौ अली अकबर खां अर दूजा आपरा ई गरू-भाई, सितार रा साजिंदा, पंडित रवि संकर।

 

आपनै जोधपुर म्हाराजा हणवत सिंघजी सूं ‘उस्ताद’, भारत सरकार सूं ‘पदमभूसण’ अर खुद रा पिता अर गरू अलाऊदीन खां साय सूं ‘स्वर सम्राट’ रौ मांन मिळियौ।

 

तेजसिंघ जोधा : आप कैलीफोर्निया (अमरीका) कद सूं बिराजौ?

 

अली अकबर खां : पनरा'क बरस व्हैगा व्हैला।

 

तेजसिंघ जोधा : देस छोड’र कैलीफोर्नियां जावा रौ कांईं कारण?

 

अली अकबर खां : औ सवाल तौ सगळा करै। देस छोड’र कोनी गयौ, खुद रै देस रौ कांम करियौ। म्हैं अठै 20-30 बरसां तांईं मजदूरी कीवी। जोधपुर में ईं 10 बरस रह्यौ।

 

तेजसिंघ जोधा : जोधपुर में कुण सै बरसां?

 

अली अकबर खां : सन् 42-43 रौ बरस रह्यौ व्हैला, कीं अैड़ौ ई अंदाजौ, आप चैक कर लीजौ पछै।

 

तेजसिंघ जोधा : मतलब के रियासतां री वगत?

 

अली अकबर खां :हां, हूं रियासतां री वगत, म्हैं जोधपुर सारू ई हौ। पण बाप जी (सरगवासी म्हाराजा हणवत सिंघजी) रै सरगवास पछै म्हैं गयौ परौ अठै सूं। फेर कॉलेज खोल्यौ कलकत्तौ में। नौकरी म्हैं फगत अेक ई कीवी, जोधपुर री, पछै इंडिपेंडेंट। लूण फगत अेक रौ ई खायौ। कलकत्तै रै पछै, सन् 55 में गयौ यूनाइटेड स्टेट। यहूदी मेनुहिन बुलायौ। उण रै पछै कनाडा, अमरीका अर इयां करतां-करतां 65 सूं आइ हैव अैक्च्वली स्टार्टेड टीचिंग इन स्टेट, कैलीफोर्निया।

 

उणरै पछै लड़का ज्यादा व्हैगा तौ म्हैं सोच्यौ, इतरा आदमियां नै हिन्दुस्तांन लाऊं, इण सूं तौ म्हैं अेकलौ ई वठै पूग जाऊं तौ ठीक कांम रैसी। नाट हैडक। तौ पछै रैयगा वठै, तौ रैयगा, खुद रौ कॉलेज बणाय लियौ। अर वठै ई खुदरी फैमेली जैड़ा ई सगळा लोग।

 

तेजसिंघ जोधा : स्टेट्स में रैसपोन्स इंडियन म्यूजिक रौ?

 

अली अकबर खां  : खूब बढ़िया, खूब ज्यादा, मतलब हिन्दुस्तांन जैड़ौ ई व्हैगौ। 20-25 बरसां पैली संगीत सारू हिन्दुस्तांन में जिकी बातां व्हैती, वै उठै अब होवण लागी।

 

तेजसिंघ जोधा : कॉलेज में आपरै अलावा दूजा ई पढ़ावण आळा होसी?

 

अली अकबर खां : नीं, पैली हा। पैली म्हैं इंडिया सूं काफी स्टॉफ लेय’र जातौ। अब जरुत कोनी पड़ै। क्यूंके अब जिका अैडवांस स्टूडेंट है, वै टीचर बणगा। इण वास्तै अेक म्हैं हूं अर अेक जाकिर हुसैन वै है, इणरै अलावा तौ बाकी कोई नीं।

 

तेजसिंघ जोधा : साल में अेकाधी वळा तौ भारत पधारता ई व्हौला?

 

अली अकबर खां : हां आऊं अेकाधी बार। साल में अेक वार मां नै देखबा सारू आऊं, पछै आस्यूं के नीं, कीं ठाह कोनी।

 

तेजसिंघ जोधा : इतरा बरसां पछै जोधपुर आया कैड़ौ लागौ?

 

अली अकबर खां : बौत आछौ। जोधपुर में औ जिकौ मकांन है (कुचामण हाऊस, साह गोरधनलालजी काबरा रौ मकांन) म्हैं अठै संगीत छोड’र गयौ, अठै सूं कीं लेय’र कोनी गयौ।

 

तेजसिंघ जोधा : सरोद रा दूजा घराणां में आप किण-किण रा नांव लेस्यौ?

 

अली अकबर खां : अेक ई दूजौ घराणौ फेर है; वौ हाफिज अली खां साब रौ है। बाकी तौ कोई घराणौ...।

 

तेजसिंघ जोधा : सरोद रा नवा आता लड़कां में, आप सूं पछै री पीढ़ी में, आपरै ई घरांणै में कुणसा लड़का ‘प्रोमीजिंग’ लागै?

 

अली अकबर खां : नीं, यूं तौ सगळा ई है। ब्रजभूसण जी (ब्रजभूसण जी काबरा धकी हाथ करतां) ई इणी घरांणै रा है। यूं तौ बौत लोग है। बसंत लड़कौ है। (बसंत काबरा कानी मुड’र देखतां) बसंत जी सीखण में लाग्योड़ा है। यूं खासा उमीद है ‘फ्यूचर’ रै वास्तै। कोई कमी कोनी।

 

तेजसिंघ जोधा : कांईं स्टेट्स अर यूरोप रा देसां में भारत रै संगीत रौ अेक सारीसौ ई असर?

 

अली अकबर खां : हां, आजकालै अेक सारीसौ ई व्हैगौ। जद म्हैं पैलमपैल गयौ तौ घणासारा लोग भारत रै बाबत ई कोनी जांणता। अब तौ संगीत रै जरियै सूं अर कियां ई व्हौ, अब तौ अैड़ौ व्हैगौ के सगळा जावण में लागियोड़ा  है। आंणद लेवै। म्हैं जद गयो तौ जीयां सड़क बणावै...म्हनै अेकलै नै खूब मैणत करणी पड़ी। उणरै पछै तौ अब जिका लोग जावै, वै खूब धन कमावै, पण कोई बात कोनी। म्हैं तौ संगीत रौ प्रचार ई म्हारौ उदेस जांणू, क्यूंके म्हारै गरू (पिता अलाउदीन खां साब) रौ कैवणौ हौ के जठा तांईं सूरज-चांद री रोसणी पूगै, वठा तांईं आपां रै संगीत रौ प्रचार होवणौ चाहिजै।

 

तेजसिंघ जोधा : जोधपुर रियासत रै बगत री कोई खास बात, जे याद आवती व्है?

 

अली अकबर खां : सब ई खास। आप देखौ अठै मामा साब (कर्नल मोहनसिंघजी भाटी) बैठा है। पण रियासत रै बगत बापजी री आ बात ही के अठै सबसूं मोटौ सेन्टर होवै म्यूजिक रौ, फिलम रौ, सब चीज रौ। अर औ कैय दियौ के आपनै जिकौ कीं करणौ होवै, करौ। दूजौ उण आदमी रौ प्लॉन हौ। मंजूर कोनी हौ, कोनी व्हियौ। नीं तौ म्हैं क्यूं जावतौ अमरीका? जिकी बात अठैं नीं कर सक्यौ, तौ म्हनै जावणौ पड़्यौ अमरीका। क्यूंके बापजी रै अलावा म्हारै दूजौ कोई ‘बैकबोन’ कोनी हौ इंडिया में। तौ म्हनै बैकबोन ढूंढवा सारू अमरीका जावणौ पड़ियौ।

 

तेजसिंघ जोधा : रियासत री बगत आप कीं दिनां जोधपुर रेडियौ स्टेसण रै डाइरेक्टर पद माथै ई रह्या?

 

अली अकबर खां : हूं, वौ तौ टेम्परेरी खुलियौ कीं दिनां वास्तै अर सब खतम व्हैगौ।

 

तेजसिंघ जोधा : सरोद रै बाबत आप कीं बतास्यौ?

 

अली अकबर खां : हां, सरोद रै बाबत आप कांईं जाणबौ चावौ!

 

तेजसिंघ जोधा : ज्यूं के सितार ई तार रौ बाजौ अर सरोद ई तार रौ बाजौ, आंमै कीकर फरक करस्यां, सरोद रौ जिकौ विकास होयौ व्हैला…?

 

अली अकबर खां : वौ म्हारा पिताजी करियौ। पण औ सरोद आयौ भरत मुनी रै बगत में। औ भरत मुनी रै इतिहास में आपनै मिळसी। आज सूं 2 हजार साल पैली। वां आविस्कार करियौ। औ वीणा रा प्रकारां में आवै। इणरौ पूरौ नांव है—‘सरोद धायक वीणा।’

 

म्हारा पिताजी इणरौ पूरौ नक्सौ इत्याद अैड़ौ बणायौ के औ ‘सौ’ नै ‘रथ’ कर सकै। इणमें आप हजार बाजा अेक ई में बजाय सकौ। कांईं व्हैतौ पैला के इणीं सरोद नै बजावण सारू, के इण स्टाइल रौ क्लासिकल बजावण सारू, चार-पांच बाजा साथै लेय’र जावणौ पड़तौ। टू कम्पलीट। अबै अेक ई बाजौ कम्पलीट। फेर आप लोगां सुणियौ, आप लोग जांणौ के आपनै कैड़ौ लागौ?

 

तेजसिंघ जोधा : कहबौ ई कांईं, म्हनै तौ पैलीवार लागौ के संगीत कीकर जिनावरां धुराधुर रै कांम री चीज होवै!

 

अली अकबर खां : बात आ के औ मरदानौ बाजौ। इणमें मिठास लावणौ मतलब लुगाई-जात में फूटरापौ होवै ई, अर वौ देखवा में ईं आछौ लागै, पण मरद में खबसूरती लावणौ, वौ तौ कोई महान रिसी होवै तौ कोई बात...

 

तेजसिंघ जोधा :  आपरै हाथां पूग सरोद जींवती व्है जावै!

 

अली अकबर खां : कांईं ठा जींवती होवै के नीं, पण मैणत अणूती करावै। संगीत अेक अैड़ी चीज है नीं, संगीत इण सारू बणियौ के आ अेक किसम री पूजा है, अेक किसम रौ रस्तौ है भगवांन तांईं पूगवा रौ। मोक्ष रै सारू। औ ‘अैन्टरटेन’ रै सारू तौ नीं ईं हौ। माइंड रै जॉय सारू ई नीं। औ मोक्ष रै वास्तै सब सूं आसांन तरीकौ हौ। अब इणरा स्टेज होवै। च्यार स्टेज होवै। केई लोग दो स्टेज माथै ई खतम व्है जावै। पैलै अर दूजै स्टेज माथै तौ आ ‘मोहिनी विद्या’ बाजै। मोहिनी में जै पड़गा, तौ खतम। उण सूं जे निकळगा तौ आपनै इणरौ असली रस्तौ निजर आवै। संगीत म्हैं जिण भांत सीख्यौ, तौ पिताजी म्हनै इण वास्तै कोनी सिखायौ के पीसा कमाय लूं या नांम कमाय लूं। वांरी मनस्या ही के इणनै साधना कर’र उण ठौड़ पुगावणौ चाहिजै के उणरै पछै ई जे लोग सुणै तौ वांरा दिल-दिमाग ठिकांणै आय जावै।

 

मन नै सांयत मिळै। संगीत में अैड़ौ व्है सकै, अैड़ौ तानसेन इत्याद रै बगत में होयौ है, अैड़ौ म्हारै पिताजी रै बगत में ईं होयौ। तौ इण वास्तै म्हैं ज्यादा प्रोग्रांम कोनी करूं। म्हैं खुस हूं वठै स्टेट में के चालौ कॉलेज देखूं, खुद ई देखूं। कदैई जे पीसां री जरुत पड़ जावै, कॉलेज नै, तौ प्रोग्रांम करूं, बैनीफिट सारू।

 

तेजसिंघ जोधा : कांईं कुद रै देस में अैड़ै किणीं कॉलेज रौ विचार आपरै मन में कोनी आयौ, या उण सारू सरकारी के गैर-सरकारी गुंजायस कोनी लागी?

 

अली अकबर खां : खुद रै देस में! म्हैं खूब कोसिस कीवी, पण कोई मदद कोनी मिळी। म्हैं सरकार सूं ईं कोसिस कीवी। हिन्दुस्तांन में, इण देस में आ है के, कैवै है नीं के आप जठै तांईं माखण नीं लगावौ, पण आजकाल तौ माखण ई कोनी मिळै। हिन्दुस्तांन इण काबिल कोनी। अठै सोर्सेज री सिफारस री जरुत है। अर म्हारी सिफारस तौ फगत संगीत ई है... वठै ई म्हैं सरकार सूं कोई खास मदद कोनी लेऊं। लड़का लोग है, आवै। उणरै पछै बैनीफिट प्रोग्रांम व्है जावै। खासा मेंबर्स बणगा, जिणरै जिम्मै जिकौ आवै, ‘डौनेसन’ भेज देवै।

 

तेजसिंघ जोधा : कॉलेज कनै खुदौखुद रौ भवन होसी?

 

अली अकबर खां : हां हां, सब खुद रौ बणाय लियौ, जिकौ म्हैं अठै कदैई बणाय कोनी सकतौ। अठै सस्तौ हौ, तौ ई संभव कोनी हौ, वठै सस्तौ कोनी, तौ ईं संभव व्हैगौ।

 

तेजसिंघ जोधा : अब तौ बाजा इत्याद वठै ई त्यार व्हैता व्हैला?

 

अली अकबर खां : नीं सब इंडिया सूं जावै। आज वठै घर-घर में भारत रा बाजा लाधै अर भारत री हालत आ है के नवी पीढ़ी सूं पूछौ के पोप सिंगर कुण है, तौ झट जार्ज हैरीसन रौ नांव बता देसी। पण आप पूछौ के अली अकबर कुण है, तौ कहसी म्हांनै ठा कोनी।

 

तेजसिंघ जोधा : भारत रा बाजां रै साथै परदेसी बाजां री संगत बैठै के नीं?

 

अली अकबर खां : बैठ सकै, पण म्हैं कोसिस कोनी करूं। आप आपरी ठौड़ जिकी चीजां है, वांनै वठै ई रैवण देणी चाहिजै। हां आर्केस्ट्रेसां रै वास्तै इस्तेमाल करबौ चावां तौ बैड़ौ हौवै, पण किणी चीज नै बिगाड़्बौ ठीक बात कोनी। फेर किणी संगीत में किणी भांत री खांमी कोनी, उणनै बिगाड़बा सूं कांईं फायदौ?

 

तेजसिंघ जोधा : अठै रै अर बठै रै संगीत में आपनै मूळ फरक कांई लागै?

 

अली अकबर खां : वांरा जिका क्लासिकल म्यूजिक है, वै ‘रिच’ है ‘हारमनी’ सूं। आपांरौ जिकौ संगीत है, वौ ‘मैलोडी’ में ‘रिच’। ज्यूं अेक सुर लगावां तौ जीव में पूगै। आछौ लागै। कानां नै आछौ लागै। वठै अेक सुर दिखावण सारू वै लोग 8-10 ‘काम्बीनेसन’ लावै। तौ फुल ऑफ हारमनी एंड फुल ऑफ मैलोडी।

 

तेजसिंघ जोधा : अब पाछौ भारत कद तांईं आवणौ होसी?

 

अली अकबर खां : वौ तौ म्हैं आप सूं अरज करियौ नीं, जद तांईं मां जींवती है, आऊं। उणरै पछै पतौ कोनी आस्यूं के नीं आस्यूं।

स्रोत
  • पोथी : माणक (पारिवारिक राजस्थांनी मासिक) ,
  • सिरजक : अली अकबर खां सूं तेजसिंघ जोधा री बंतळ ,
  • संपादक : तेजसिंघ जोधा ,
  • प्रकाशक : माणक प्रकाश ,
  • संस्करण : मार्च 1981
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