(1)

टपकै आंसू
लोग पूछै, म्हैं कैवूं-
आंख्या खराब

(2)

दरद आटो
दिन-रात पीसै है-
बगत घट्टी

(3)

आपणा बैरी
दरकाई कांई है-
पाळूं दुसमी

(4)

पूछै नीं जीवो
मर्‌यां पछै मलीदा
जीमो जीमण

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो पत्रिका ,
  • सिरजक : रतनसिंह ‘रत्नेश’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा
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