यारी तो करबो चावै छै यार टापरी सुरज्या की
पण सूरज सूँ सरमावै छै यार टापरी सुरज्या की
ऊँका माथा सूँ जद चूवै केसर अर चंदण को घोळ
च्यारूँ खूण्याँ गरणावै छै, यार टापरी सुरज्या की
अब्दुल्ला का च्यार कूकड़ा, जागै छै मंगला की टेम
वाँ की लारां उठ जावै छै, यार टापरी सुरज्या की
स्याळा मांही लग-लग धूजै, चूवै छै चौमासा में
भर्या जेठ में तरणावै छै, यार टापरी सुरज्या की
रामूभैया! गंगाजल सो पाक साफ छै सुरज्यो बी।
बरी बोलतां कतरावै छै, यार टापरी सुरज्या की