कांटा भेळै बाड़ करी म्हैं

खुद सूं खुद री राड़ करी म्हैं

आंथूणै जद ऊग्यो सूरज

अंधियारा री आड़ करी म्हैं

जिण मायड़ सूं सीखी बोली

उण सूं छेटी नाड़ करी म्हैं

आखर मुळक्या कागद ऊपर

डूंगर-मरूथल भाड़ करी म्हैं

रै जावै सत रो उणियारो

ओछी बातां ताड़ करी म्हैं।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मोहन पुरी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-31
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