जद तांईं जीणो है

जैर पीणो है।

मन-सीप दुख पाळ्यो

मोती खरो अभीणो है।

पीड़ री पाडी पाळी

आंसुवां रो धीणो है।

राम चद्दर फाटी फीसी

जीणो तद तक सीणो है।

आंख्यां रिगत झटै यूं

काळजो नई तीणो है।

थां बिन जीवण जीणो

मौत रो मीणो है।

सांस-सांस उमर बीतै

समै सांप पीणो है।

मौत-जीवण आमै सामै

बीच पड़दै झीणो है।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : लक्ष्मीनारायण रंगा ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 13
जुड़्योड़ा विसै