मुन्डै रैगी बात भाइला

फेरूं व्हैगी रात भाइला

सुपणां री ओळ्यूं नीं आयी

खाण्डो व्हैगो साथ भाइला

जिया जूण नै पाती मांडू

करै दगा अर घात भाइला

बम बणै है मिनख जठै नित

किणनै लेवूं बाथ भाइला

कुंपळ-कूंपळ मान्डा मान्डै

उड ग्या जूना पात भाइला

कुण गीता नै बांचै ‘मोहन’

राखै फिलमां भांत भाइला।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मोहन पुरी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-31
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