अंतस में उजियारौ राखौ

भेळप भाईचारौ राखौ

सगळी थारी म्हारी छोड़ौ

ईसर पर पतियारौ राखौ

आया हौ थैं मिनखांजूणी

मिनखां सो उणियारौ राखौ

जगती रै झूठै जंजाळां

भगती रौ भणकारौ राखौ

उठ परभातां मुधरी रागां

हेली अर हलकारौ राखौ

मन मिंदरियै राधा मीरां

कान्हौ कामणगारौ राखौ

ओळूं करती आंखड़ल्यां में

प्रीतम रौ पळकारौ राखौ

तरवर,सरवर,ओरण, गौचर

गांवां में गळियारौ राखौ

बण इमरत आभै चढ बरसै

समदरियौ भल खारौ राखौ

पड़वै रै पसवाड़ै प्रीतां

चंदौ,सूरज, तारौ राखौ

सोनल रातां, सुपनां पीड़ा

धवळौ दिन न्यारौ राखौ

सावण भादव कजळी तीजां

सखियां अर सिंझारौ राखौ

चकवौ,चकवी,राजा,जोगी

बातां में हूँकारौ राखौ

रिनरोही में रथड़ौ जोतै

बाळद अर बिणजारौ राखौ

स्रोत
  • सिरजक : रतन सिंह चांपावत ,
  • प्रकाशक : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
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