बीं की मेरी है दोस्ती, जीयां

नदी रै कनै व्है नदी, जीयां

घर में मां यूं करीब बैठी है

पास बैठी व्है रौशनी, जीयां

पिता यूं सीस पर सलामत है

धूप में छांव व्है घणी, जीयां

मनै यूं भाईयां रो सम्बल है

नाव पतवार सूं मिली जीयां

साथ भाणां रो यूं मयस्सर है

राख्यां हाथ में बंधी जीयां

आंगणा में घुमेर पतनी की

लौट आई व्है चांदनी जीयां

स्वारथ छल रा भर्‌या जमाना में

दोस्त मेरी है बानगी जीयां

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : कुंदन सिंह 'सजल' ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशक पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 23
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