अस्यौ कस्यौ रूंख जिको पून सूं नीं हाल्यो

असी कसी मायड़ जिकी पूत नै घी नीं घाल्यो

जुवानी आयां सगळा पौमावै अर रुळ जावै

किण नै देवां दोस तो जुगां सूं ही चाल्यो

पुहुप जद खिलै तो देखणियां नांखै मरोड़

माळी बणाई बाड़ पण कूद पड़्यो काळ्यो

जतरी लिख्योड़ी सांसां वतरी ही लेवै जीव

अेक पळ बेसी नीं जीवै जम कुण नै टाळ्यो

अेक पळ रो बो दूजै में हंसबौ ही जिन्दगी

सुख-दुख सगळा भोगै म्हैल व्है कै माळ्यो

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : विनोद सोमानी ‘हंस’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी ,
  • संस्करण : अंक-44
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