कियां होई रपट है, के पूछरैया हो आप
कितनो बड़ो कपट है के पूछरैया हो आप
जळ कर क राख हो गयो विसवास रो महल
कियां उठी लपट है, के पूछ पूछरैया हो आप
रिसतां री धार ही तो, दिल नै कर्यो कतल
किसी विकट घड़ी है, के पूछरैया हो आप
कैवत तौ आ रही है क जीत साच री हुवै
अब तक तो आ ही रट है, के पूछरैया हो आप
कैं की महक सूं अब तक, म्हे हां खुमारियां में
काळी बा कैं की लट है, के पूछरैया हो आप।