कियां होई रपट है, के पूछरैया हो आप

कितनो बड़ो कपट है के पूछरैया हो आप

जळ कर राख हो गयो विसवास रो महल

कियां उठी लपट है, के पूछ पूछरैया हो आप

रिसतां री धार ही तो, दिल नै कर्‌यो कतल

किसी विकट घड़ी है, के पूछरैया हो आप

कैवत तौ रही है जीत साच री हुवै

अब तक तो ही रट है, के पूछरैया हो आप

कैं की महक सूं अब तक, म्हे हां खुमारियां में

काळी बा कैं की लट है, के पूछरैया हो आप।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मधुकर गौड़ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-31
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