कुवै पड़गी भांग भायला कांईं होसी

चढ़गी खुमार भायला कांईं होसी?

जन सेवा रौ नांव नोट सूं घर भरणौ

किण नै देवां वोट भायला कांईं होसी?

झूठां झांसा देय मसखरा सै नटग्या

रुळग्यो सो रूजगार भायला कांईं होसी?

बूढ़ां-ठैरा नै काम छोकरा सै पिटग्या,

जनता ढोवै भार भायला कांईं होसी?

राम रूठग्यौ परतख रावण बस्ती में

राम राज लाचार भायला कांईं होसी?

बुध-बळ नै धन-बळ जद जीतै

जन-बळ तो निरधार भायला कांईं होसी?

संभळ सकौ तो संभळो जोध जवानो रै

पड़गी मैंगाई मार भायला कांईं होसी?

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : शिवराज छंगाणी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशक पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 22
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