कुण जाणै आ कसी भाळ है
सरवरियै री बळै पाळ है
बीं रै हाथ नांव रो डांडो
बो ई, डबोवण, रचै जाळ है
कापड़ मील, धणी लंगवाड़ा
अठै कफ़न रो पड़्यो काळ है
धरम करम, अर ल्या'ज सरम री
ईं खेड़ै अब हुयी टाळ है
मरां तिसाया, पड़ै तिंवाळा
तिरै पूणतो तरण-ताल है
गांठ काटली, धोळ पोस बण
कुण ‘रै’ कहदे, के बबाल है
नकटा नाड, चांद खेड़ै रा
गैंडा सूं बी सख्त खाल है।
सोगन खाय, पान ज्यूं दिन भर
रोटी, रोजी, रो सवाल है
मुर्ग-मुस्सलम, बठै पतीळै
ढूंढा दाणों कठै दाळ है
देसी घोड़ी, धोरां दौड़ी
बसगी शहर लगाम लाल है
बासी कढ़ी उफणती छण-छण
बगत-बगत रो ओ उबाळ है
बा मैजीत अर ओ है मंदर
मन फाटणिया करै चाळ है
बछिया कटै, कसाई हाथां
जठै ‘देज’ री नीं उछाळ है
‘रसिक’ यार कुणनैं के कैवां,
तनडै मनड़ै भरी झाळ है।