हिम्मत मत यूं हार, भायला चाल्यां जा

ले करड़ी तूं धार, भायला चाल्यां जा

आज घणी बाधावां पसरी गेलै में

आं रै ठोकर मार, भायला चाल्यां जा

मत सागै री आस राख थारै मन में

कर खुद पर बिस्वास, भायला चाल्यां जा

जे चालैलो लोग आ’र मिलता जासी

बंटतो जासी भार, भायला चाल्यां जा

मन में राख भरोसो छेवट जीतैलो

कदै मानी हार, भायला चाल्यां जा

आ’र सुफळता जयमाळा पैरावैली

होसी जै-जै कार, भायला चाल्यां जा।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : सीताराम महर्षि ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-33
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