बेच्या हाथ बाजार कै अबै कैवां कैनै
माथा किया नीलाम कै अबै कैवां कैनै
फैल रैयो है जै’र अबै सांस-सांस में
पाळ्या पीवणां सांप कै अबै कैवां कैनै
धोळा चोळा पै’र लुकावै काळी देही
बसै अठै किरकांट कै अबै कैवां कनै
मन घणो उदास तन सज्यो-धजियो
पोसाकी हुयो संसार कै अबै कैवां कैनै
ऊंचा घणा मकान, मिनख बावनियो हुयो
गुण पौंच्या पताळ कै अबै कैवां कैनै
मिन्दर-मस्जिद भांग जळावां गुरुद्वारा
जपां राम रो नाम कै अबै कैवा कैनै
फोड़ा घणी बात कै ऊंचा भाषण देवां
उळझ्योड़ा खुद आप कै अबै कैवां कैनै
कठपुतळ्यां रो देस हुवै अठै खेल अजूबा
दी डोर दुजां रै हाथ कै अबै कैवां कैनै।