ढाणी म्हानै जमाणी छै

लियो हाथ म्है पाणी छै

थांग पताळां ऊंडै री

सामरथां जग जाणी छै

पड़तो आसमां झेलण री

हैसत लोग पिछाणी छै

तूफानां रो रूख मोड़ूं

नावां अठै चलाणी छै

मौतड़ी भूल'नै भाया

सोहरत अबै कमाणी छै

रसतौ अबै कवण रोकै

ललकारां लगवाणी छै

बुहारौ मौत रा पथ नै

जुहारौ जिदगाणी छै

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : लक्ष्मणदान कविया ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी ,
  • संस्करण : अंक-44
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