ढाणी ढाणी फिरतां म्हारी बणगी कहाणी रै

म्हारी हालत देखौ दुनियां नांव पिछाणी रै

तिरसौ भूखौ खाय तिंवाळी खेजड़ लीनी छांव

मनवारां कोई नीं कीधी भूख बधाणी रै

सहरां मांही जाय'र बसिया ढाणी याद आय

गायां बिन सूनी छै गोहर साख गमाणी रै

दो नंबर रा काम किया जद ढाणी व्ही बदनाम

अखबारां में खबरां छपगी पैठ उडाणी रै

उन्हाळै में आंध्यां आवै ढाणी उडगी बाड़

गिनरत करणी धणी भूलगौ खैंचा ताणी रै

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : लक्ष्मणदान कविया ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी ,
  • संस्करण : अंक-44
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