बात बात में कोई बात बणैगी

बिगड़ोड़ी बणै बात तो साख बणैगी

कांई हो रिया मोंदा थै कद-काठी पै

अेक दिन देह भी थांरी खात बणैगी

थांरै भोड में है जे अकल रा दाणां दो

मिनखां मांय देखियो थांरी औकात बणैगी

दोरो भोत हुवै रिश्तो हेत रो निभावणो

थांरै सूं नीं तो कोई और रै साथ बणैगी

देख देखकर मुळकै है कांईं ओलै छानै

अयां लागै तावळी कोई बात बणैगी

पीवै पाव चाव सूं जदै भायलां साथै

डिगा खाती मतवाळी काळी रात बणैगी

जीत कै नसै में मत डूबिए कदै भावुक

जीती बाजी भी हो सकै कदै मात बणैगी॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो 2017 ,
  • सिरजक : लियाकत अली खां ‘भावुक’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी ,
  • संस्करण : अङतीसवां
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