आंखड़ल्यां में रमगी रात।
आई-गई सै व्हैगी बात॥
चन्दरमा रै गालां ऊपर।
घेवर छांट्या आखी रात॥
किरणां री नथड़ी सूं ढूळग्या।
सगळा मोती अेकै साथ॥
होठां रो रंग मुळकण लाग्यो।
बरस सोळवैं छेली रात॥
मेहंदी रो रंग ऊपर चढ़ग्यो।
चवड़ै-धाड़ै रातों-रात॥