आपरी माड़ी सी बा बाण, म्हानै ठा है।

आपरी कळजीबी जुबान, म्हानै ठा है।

केवो जिको करवाल्यो हुंस्यारी आपरी

नटियां सूं निकाळ लेवो जान, म्हानै ठा है।

निजर सूं तिड़ाय देवो सिलावां आप तो

नीं तिड्यां रैवे कुण सै थान, म्हानै ठा है।

हाकिमाई में लागो हिटलर रै बाप सा

डरपर राखै सारा मान, म्हानै ठा है।

रीत रगदोळर काढ्यो है आंटो आप तो

नेगचारी सिसक रिवी लाण, म्हानै ठा है।

स्रोत
  • पोथी : राजस्थली गजल विशेषांक ,
  • सिरजक : भंवर कसाना ,
  • संपादक : श्याम महर्षि ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी साहित्य संस्कृति पीठ
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