आदमी रो आज है, गवाळ आदमी।

कर रह्यो गुमान, पाळ पाळ आदमी॥

नापियो अकास नै, पताळ पैठियो,

अजब गजब पूतळो, औटाळ आदमी॥

स्वारथी इत्तो कै, मिनख पणरी नी सरम,

गुड़क गुड़क जाय, मिळयां ढाळ आदमी॥

लाभ नी मिळै तो, हाण पुगाय दे,

आधी रोटी माथै लेवै, दाळ आदमी॥

सांप ज्यूं संडासियां में, तोई भाळजौ,

जबर जबर रोज बुणै, जाळ आदमी॥

देवता बण्यौ’र कोई आदमी रहवौ,

आदमी रै नाम, गजब, गाळ आदमी॥

ईजतां रा काकरा, कराय कोढ़ियो,

हरख करै टोपियां, उछाळ आदमी॥

‘लाल’ रा कह्या रो, आगो, लेवजो मती,

सैग हैं ओटाळ, आप-टाळ, आदमी॥

स्रोत
  • पोथी : जागती जोत अक्टूबर 1981 ,
  • सिरजक : लालदास ‘राकेश’ ,
  • संपादक : चन्द्रदान कम्पलीट ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर
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