थाक चढ़ै, छायां बतळावै
पून कान में नींद बजावै,
गेला हंस-हंस कनै बुलावै
पंछीड़ा कीयां सो जावै।
बै नै तूं बिणजारो बोल
तखड़ी लेकर साचो तौल।
बिनै तूं बिणजारो बोल॥
उमर रूप रो शंख बजावै
बिजळी चिमकै, चमक दिखावै,
बादळ आभै नाच रचावै
सावणियो अमरित बरसावै,
मन में मिसरी सैं कै घोळ
बै नै भी बिणजारो बोल।
तखड़ी लेकर साचो तोल॥
खुशबू पसरै मन हरसावै
लिछमा आकर रंग चढ़ावै,
घणो गुमान चढै सिखरां पर
उल्टा-सीधा काम करावै,
टेम देख कर फळसो खोल,
अै नै भी बिणजारो बोल
बै नै भी बिणजारो बोल
तखड़ी लेकर साचो तोल॥