सोच नै बदळो
सूरज पर कीलां मत ठोको
सुणो-सोच नै
बदळौ भाई,
जो थांनै दीखै है पूरी
बा तो है टूटी परछाई।
सुणो सोच नै बदळौ भाई॥
बादळ, चांद, हवा अर पाणी
रमै खुद रै रंग में,
इतणी रिस्तेदारी है पण
कुण होर्यो संग में,
समय हो गयो इतणो बूढ़ो
देवै नहीं सुणाई।
सुणो सोच नै बदळौ भाई॥
पाणीं में तो उतर्या हो पण
नाव पुराणी है,
समदर रीतो सारी लैरां
खुद दीवानी हैं,
बदळी-बदळी सी पतवारां
चल पावैगी के चतुराई।
सुणो सोच नै बदळो भाई॥
खुसियां रै गूंगैपण सैं थे
के ले पावोगा?
चौरावै सैं चौरावै तक
खाली जावोगा,
मुरदां में कद देखी हो थे
ज्यान भरै पुरवाई।
सुणो सोच नै बदळो भाई॥