म्हैं म्हारै गोखड़ै री खिड़की

ढक दीनी है

कारण, म्है रोवणौ सुणणौ नीं चावतौ

पण माटी सूं मैली भीतां रै पूंठ

रोवण रै सिवा कीं सुणण में नीं आवै।

गावणिया फरिस्ता थोड़ा है

भूंकणिया कुत्ता भी थोड़ा है

म्हारी हथाळियां में हजार तंदूरा समा जावै

पण रोवणौ अेक जबर कुत्तौ है

रोवणौ अेक मोटौ फरिस्तौ है

रोवणौ अेक मीठौ तंदूरौ है

आंसूड़ा हवा नै टूंपौ दै

अर रोवणै रै सिवा कीं बी सुणीजै नीं।

स्रोत
  • पोथी : रसूल अमजातोव अर विदेसी कवितावां ,
  • सिरजक : फेदेरीको गार्सिया लोर्का ,
  • प्रकाशक : रॉयल पब्लिकेशन, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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