हीरा पन्ना री ज्यूं माटी चमकी हिन्दूस्तान में!

पंडतजी री भसमी पड़गी, बाग खेत खळियान में!

सूख्योड़ा झाड़ां रै माथै, कूंपळ नुंवी-नुंवी फूटी

फळ-फूलां सूं लदग्या सगळा, उगी संकर री बूंटी

फूल-गुलाबी-लाल-हजारी, मरूधर मांय सैंस खिलग्या

लाख बरस पैली रा खोया, मोतीड़ा पाछा मिलग्या

बोली, कोयल कूक डूंगरां भारत देस महान में

पंडतजी री भसमी पड़गी, बाग खेत खलिहान में!

लिया हिलोळा सरवर सांचा, बादळ चढ़ आभै गाज्या

पूत जगाया, जामण सोया, राम-किसन आया भाज्या

पकड़ो हळ हाथां में जायां, धरती रो सिणगार करो

मींणत करो रूपाळी, सगळा मिनखपणै रो नाम करो

निपज्या मोती ऊसर-बंजर, निपज्या रे समसाण में

पंडतजी री भसमी पड़गी, बाग खेत खलिहान में!

ज्वार, बाजरो, मक्को निपज्यो, भूखा रा भंडार भर्‌या

सुरग-लोक रा देव देख नै, चोखा मंगळचार कर्‌या

भेज्या चाकर जमना तट पै, सरधा-भाव-चढावण नै

हाड-मांस रा फूल मंगाया, जीवण सुफळ बणावण नै

गावां, नगरा, तीरथ म्हारा, नेहरू राजस्थान में

पंडतजी री भसमी पड़गी, बाग खेत खलिहान में!

स्रोत
  • पोथी : ओळमों ,
  • सिरजक : केशव पथिक आचार्य ,
  • संपादक : किशोर कल्पनाकांत ,
  • प्रकाशक : कल्पना लोक प्रकाशन रतनगढ़ (राज.) ,
  • संस्करण : नवम्बर
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