तीजौ पोर कैवै—म्हूं छियां रौ तिरसौ
चांदड़ळौ कैवै—म्हनै है तारां री तिरस
बिल्लोरी कांच ज्यूं निरमळौ झरणौ होठ मांगै
अर हवा हूसका चावै।
म्हूं तिरसौ हूं खसबू अर हंसणै रौ
म्हूं तिरसौ हूं चांदड़ळै, कमोदणी अर
झुरियायी प्रीत सूं अळगाता
गीतां रौ।
काल रौ अेक अैड़ो गीत
जो भविस रै सांत जळ में हल्लाण करै
अर वांरी लैरां अर कादै नै
ऊजळी आस सूं भरदै।
अेक लालचट लाखण जिस्यौ टळ्यौ गीत
विचारां सूं लबालब
पिछतावा अर पीड़ सूं अळगौ
उडन्ता सपना सूं बेदाग
अेकण गीत जे चीजां री आतमा तक पूगै
हवा री आतमा तांई
अेकण गीत जे आखिर में अनन्त हिवड़ां
रै आणन्द में बिसांई लै।