धिन धिन लिछमी जगतधिराणी, थारै धकै भरै सह पाणी।
थांरी बेराजी राजी सूं, महानगर बणजावै ढाणी।
निबळां नै सबळा कर नाखै, थारी नेह तणी निगराणी।
पूजवांण कर जगत पूजावै, कमला थारी किरप कहाणी।
जोगा नाजोगा बणजावै, थारी तूठं'र रूठ रूझांणी।
दिन नै रात, रात दिन कर दे, थारी मायाजाळ पिछाणी।
दिसटी अेक न्याल कर देवै, करै सलाम जगत रा प्राणी।
मेर हुयां थारी बधजावै, मूरख मानेता माडांणी।
कोप कियां थूं जीवण कोरो, दुख दाळिदर पिलावै घाणी।
थारी मेर हुयां ढकजावै, अघ बदनीत अन्याव निसाणी।
थारै घर आतां ही थोकां, बोलै मिनख गरब री बाणी।
लारै रहियोड़ा नर लोकै, आप मेर करदे अगवाणी।
काम न सरै मरै नर रिबरिब, आयां थारी रीस उफाणी।
लाभ न मिळै कोप थूं करियां, पग पग ऊपर होवै हाणी।
आलीसान हवेली बंगला, थारी इधकी मेर कराणो।
जोग रोग बण कळह बधापौ, कोप तिहारौ करम कुसाणी।
आप मेर सूं नेता अफसर, मौजां मांणै सेठ सेठाणी।
कंजूसां घर थारौ वासौ, दातारां घर कमती आणी।
तूंही धंधै विणज वोपारां, कीरत कारोबार बधांणी।
थित वासौ बाजारां थारो, खेत खळां में लेय बिसांणी।
ठेकेदार वकील ठिकाणौ, डाक्टरां घर पैठ फैलाणी।
आसामी रौ हियौ अमूझै, बौरे दादागिरी दिखाणी।
धीव तणा निरधन धनवानां, तूंही पीळा हाथ कराणी।
बनड़ा रूस तजै बीनणियां, तुरत टीका दायजा ताणी।
माड़ौ भर्यां मायरौ बैनड़, नांखै निसासां नैण भराणी।
माया थारी सकल सरावै, ग्यानी पंडित संत सुजाणी।
कविया लिछमण दाखी कीरत करौ स्वीकार कवि निजराणी।
धिन धिन लिछमी जगत धिराणी, थांरै धकै भरै सह पाणी।