बीस हथी भुज बीस सूं, लेर झले त्रहूं लोक।

जै दबिया येकण जगा, करण बिसव परळोक॥

सझे भुजां सूं अढार अद्री दधा नाग दैत साहे,

सिखा मेघ क्रता द्रग समाये समीर।

सुरां संत चूड़ चक्र खप्र खाग सूळ साये,

प्रथी आभ करां चंडी संमाये पैसीर॥

सम्हे दोरां द्रुम पाड़ नदी कूंम नीच सम्हे,

क्राळ मेघां मुद्रकाळ दीस अंधकार।

निज्र सेवी हेम सुद्र छंदा सार त्रिसूळ नै,

धात्री खै अमेंस आचा जोगमाया धार॥

झेले पांणां पत्री कूंतर सिंधू चीळ मेछ झेले,

पावक पावसूं जज्र गज्र वात पेस।

देव जनां खंच दूठ प्यालो तेग त्रीदसान,

गोम बोम सुधा बांह भवानी ग्रहेस॥

पाकड़े हसत्तां कुंट गोत्र बारिध ब्याळ पापी,

धनंजे' जळद्‌दू मीच थंबा गंज धाक।

ग्रीवा साध बज्रा गोळ पत्र रुंक त्रसूं ग्रहे,

रसा नाभ पीवखूं करग्णां मात राख॥

जड़ां परां नीर बिखूं धोम ज्वाळा धारा जाळ

सुंडा बेग रिछा तार रूप सझा पीण।

मारपोथ तळा जाय आझुकास जीव मांड,

पंच साखां ग्रहे एतां ईसरी प्रवीण॥

आप आप तणा तेज सबै बिसतार आंणे,

नै तो प्रथी नास कार गमादे नाखांण।

बीसहाथां बीस हथी झेलिया जरूर बदै,

बदै संकर देवी बीस हाथां रो बाखांण॥

स्रोत
  • पोथी : राजस्थानी शक्ति काव्य ,
  • सिरजक : शंकरदान सामौर ,
  • संपादक : भंवरसिंह सामौर ,
  • प्रकाशक : साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली ,
  • संस्करण : द्वितीय
जुड़्योड़ा विसै