डिंगलगीत पर गीत

गीत17

गीत श्री गंगाजी रो

शंकरदान सामौर

ऋतु वर्णन

शक्तिदान कविया

भूलां न म्हे थारा चरण

केसरीसिंह बारहठ

बीस हाथां रो बाखांण

शंकरदान सामौर

गीत - माया री मरजाद

भांवरदान बारहठ ‘भांण’

बडा बोलतो बोल उदमाद कर

चंडीदान मिश्रण

राजा प्रजा संवाद

केसरीसिंह बारहठ