कपड़ो ले परदेस को,
थे घणां हुआ बेकार।
जल्दी चेतजो॥
रोटी छिन गई दीन की,
नष्ट हुओ व्यापार।
जल्दी चेतजो॥
बरसा बरसी जा रह्यो,
धन करोड़ बार।
जल्दी चेतजो॥
चरबी लागै गाय की,
इण भ्रष्ट कियो आचार।
जल्दी चेतजो॥
फ़ैशन में सब ही फँसे,
तन भीणे कपड़े धार।
जल्दी चेतजो॥
जाय चुकी है सादगी,
इण वस्त्र विदेशी लार।
जल्दी चेतजो॥
चमक दमक के वेश से,
है फैल रह्यो व्यभिचार।
जल्दी चेतजो॥
भांत चला कर नई नई,
है खींचे द्रव्य अपार।
जल्दी चेतजो॥
मलमल-मखमल जोरजट,
है घर-घर में प्रचार।
जल्दी चेतजो॥
जो खादी धारण करो,
हो जावै उच्च विचार।
जल्दी चेतजो॥
'धीरज' धारण कर रह्यो,
है खादी को सब कार।
जल्दी चेतजो॥