हफता, म्हीनां, साला में, सारो जीवन।

उळझ्यो रह्यो सवालां में, सारो जीवन॥

दम घुटतो रह्यो, सदा मैंगाई सूं।

घर लुटतो रह्यो, सदा मैंगाई सूं॥

लेण-देण रा जाळां में, सारो जीवन।

उळझ्यो रह्यो सवालां में, सारो जीवन॥

चिंता री चिलमन बेटी से ब्याह, रह्यो।

मौसम भी रोक्यां फसला री राह, रह्यो॥

सूखा नहरां तालां में, सारो जीवन।

उळझ्यो रह्यो सवालां में, सारो जीवन॥

घर रो करजो बाकी है, घर बिखर ग्यो।

बेटो लेकर साथ बहू नै, शहर गयो॥

रह्यो गिरस्थ जंजाळां में, सारो जीवन।

उळझ्यो रह्यो सवालां में, सारो जीवन॥

कदम-कदम पर खायो धोखो, के करतो।

और जीत रो लेखो-जोखो, के करतो॥

रह्यो हार रै पाळां में, सारो जीवन।

उळझ्यो रह्यो सवालां में, सारो जीवन॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : कुंदन सिंह सजल ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-34
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