दीवड़ला चस-चस नै मुळकै
टाबरिया हंस-हंस नै मुळकै
दीवाळी आई, च्यानणियो ल्याई।
गड़ड़गम्म करतोड़ा छूटै, छोटा-बडा पटाका भारी
आभै चढ़ तारा ज्यूं तूटै, चिलक दिखाता न्यारी-न्यारी,
राजू, चान्दू, कान्हो, बिल्लु, रळमिल राजी बारी-बारी
ताराझरण्यां छम-छम मुळकै
टाबरिया हंस-हंस नै मुळकै
दीवाळी आई, च्यानणियो ल्याई।
बाजै डमडम-डमडम करता, डुगडुगिया डमरू-सा डमकै
विमला, पुस्पा, देवी, मुन्नी री पायलड़्यां छमकै-झमकै
साजै दिवला-चमचम करता, छातां ऊपर जोतां चमकै
लोय सुलखणी जगमग मुळकै,
टाबरिया हंस-हंस नै मुळकै
दीवाळी आई, च्यानणियो ल्याई।
लिछमा छमछम करती आवै, दूंद-दूंदाळो ले रिध-सिध
देव पधारै देव्यां आवै, सगळा गुण वरणूं किण विध?
दीवाळी आवै जद ल्यावै, खुसियां आवै सै इणविध,
मन मुळकै अर अन्न-धन्न मुळकै
टाबरिया हंस-हंस नै मुळकै,
दीवाळी आई, च्यानणियो ल्याई।