कढ़ी तूं झूंपड़ियां सूं भाग!
बड़ी क्यूं म्हैल माळिया ढूक?
चढ़ी जा छाज-झरोखां माथ।
पड़ी क्यूं थारै मन आ चूक?
तज्या क्यूं मोटा तीरथ-धाम?
दिवाळी, अै के थांरा काम?
चोरटां सोधां रै घरमाळ
घुटाई गोधां रै घर गोठ
लुटाई दीन गरीबां दाळ
लिया भूखां रा लप-लप मोठ
राम रा रूप रूळा बदनाम
दिवाळी, अै के थांरा काम?
कव्यां पिंडतां सूं रैणो दूर
मिनस्टर नेतां रै फिर लार
कमाऊं भणिया गुणिया भूल
करै सेठां-घर जाय जुहार
चाटगी कामेत्यां रा चाम
मंगेजण, अै के थांरा काम?
कुंवारा रै घर दीसै सून
परणिया देवै नार्यां दोस
बांझड़्यां रै घर घणो अंधेर
सांझड़्या रूळै सुलखणो रोस
जोत में इस्यो कियां इंतजाम
मानवण, अै के थांरा काम?
छोड़ कर ज्वांर-बाजरी-रोट
चली बरफी-कतली रै चाव
चीरड़ा-गाठां सूं कर सूग
रळी धनपतियां रेसम-राव
बधायां खोट दोवटी-दाम
रोगली, अै के थांरा काम?
चलावै गोट जगत में जाम
फगत है वोट तणो व्यौहार
सगत है सोट जिणांरै हाथ
लोट लिछमी बरसै बे-पार
गिणै ना सरदी बिरखा घाम
दोगली, अै के थांरा काम
रची तूं सै’रा रूड़ै-रूप
जची ना ओजूं ढाणी-ढंग
पची ना पाणी रै परबंध
मची ईमीं ऊंधावण अंग
ऊडीकै आंख्यां फाड़्यां गाम
पावणी, अै के थांरा काम
ऊडीकां अेक बार सज आव
करहळां करां चढ़ाण-पिलाण
नहीं है मोटर-कार-बिंयाण
बरोबर आखा बेटा जाण
भूलज्या, भेद-भाव रो नाम
बडोड़ी, अै के थांरा काम?
तोप-बंदूक नहीं तरवार
अठै जेई-गंडास-कुंहाड़
गुलामी में क्यूं गूंगी होय
कूदज्या, आज वखत री बाड़
बणी क्यूं भाग्या रै घर बाम
मावड़ी, अै के थांरा काम?