मास आषाढ़ में वर्षा लागी

इण रुत में क्यूं पिऊ सूं आगी।

काँई रै जवाब लिखूँ रसिया॥

श्रावण में जल झिरमिर बरसे

नाथ बिना घर नारी तरसे।

काँई रै जवाब लिखूँ रसिया॥

भादरवै घनघोर अंधारी

डरपत एकली महल में प्यारी।

काँई रै जवाब लिखूँ रसिया॥

आसोज मास सदा ही सुहाए

सरदपूनम पिऊजी घर आए।

काँई रै जवाब लिखूँ रसिया॥

चार मास में जो दुख पाए

पिऊ भेट्याँ सब ही बिसराए।

काँई रै जवाब लिखूँ रसिया॥

स्रोत
  • पोथी : शुभगीत ,
  • सिरजक : श्रीनाथ मोदी
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