सूख्यो सरवर नदियां नीर

पांख पंखेरू हुया अधीर

ढोर-डांगरा री सुण पीर

अब तो मत तरसा रे

मेघा बेगो आ!

गई ऊजड़ बा गैरी छांव

घर बारै ज्यूं बळै अलाव

सांस-सांस पाणी रौ नांव

बरस-बरस सरसा रे

मेघा बेगो आ!

तीज-तिवांर मनै नीं अेक

हिवड़ै में हो ज्यासी छेक

राखां टाबरां री इब टेक

मनड़ै मोद जगा रे

मेघा बेगो आ!

पिउ पपैयो हेला मार

कोयल मोर करै मनवार

हाळी-हळिया करै पुकार

सब री प्यास बुझा रे

मेघा बेगो आ!

थूं रूठ्यो तो पड़सी काळ

थां सूं सगळा जुड़्या सवाल

अबै अेक दिन मत टाळ

झिरमिर झड़ी लगा रे

मेघा बेगो आ!

थूं इन्दर राजा रौ दूत

समदर रो तूं पूत सपूत

थनै बुलावां नित का नूंत

बण पावणियौ छा रे

मेघा बेगो रे।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : भैरूंलाल गर्ग ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 15
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